सुनील लहरी का 'लक्ष्मण' बनने का सफर: कैसे मिली उन्हें यह आइकॉनिक भूमिका?
रामायण का जादू और सुनील लहरी का किरदार
मुंबई, 8 जनवरी। रामानंद सागर की 'रामायण' भारतीय टेलीविजन का एक ऐसा अद्वितीय धारावाहिक है, जिसने न केवल धार्मिक भावनाओं को छुआ, बल्कि दर्शकों के दिलों में एक स्थायी स्थान बना लिया। 1987-88 में दूरदर्शन पर प्रसारित इस शो ने वाल्मीकि रामायण की कथा को हर घर तक पहुंचाया।
इस शो के सभी पात्रों को दर्शकों से अपार प्रेम और सम्मान मिला। भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल, माता सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया और लक्ष्मण का रोल करने वाले सुनील लहरी, सभी आज भी दर्शकों के बीच उसी आदर के साथ देखे जाते हैं। सुनील लहरी का अभिनय लक्ष्मण को इतना लोकप्रिय बना गया कि वे 'सुमित्रा नंदन' के नाम से हर जगह पहचाने जाने लगे। 9 जनवरी को सुनील लहरी का जन्मदिन है।
'रामायण' ने सुनील लहरी को एक रात में स्टार बना दिया। लक्ष्मण के रूप में उनका समर्पण और भावनाओं का चित्रण दर्शकों को इतना भाया कि आज भी लोग उन्हें इसी नाम से जानते हैं। इस शो की सफलता ने न केवल उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक मिसाल भी कायम की।
हालांकि, सुनील लहरी को यह प्रतिष्ठित किरदार मिलना पूरी तरह से किस्मत का खेल था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि कैसे उन्हें भगवान लक्ष्मण का किरदार मिला। जब उन्हें पता चला कि रामानंद सागर रामायण बना रहे हैं और इसके लिए ऑडिशन चल रहे हैं, तो वह भी स्टूडियो गए और ऑडिशन दिया। उनका चयन हुआ, लेकिन लक्ष्मण के लिए नहीं, बल्कि शत्रुघ्न के रोल के लिए।
लक्ष्मण का किरदार पहले शशि पुरी को दिया गया था, लेकिन कुछ कारणों से उन्होंने इसे छोड़ दिया। एक दिन रामानंद सागर ने सुनील को देखकर कहा कि वह लक्ष्मण का किरदार निभाएं। शशि पुरी ने भी सुनील को इस रोल को करने की सलाह दी। इस तरह सुनील लहरी 'सुमित्रा नंदन लक्ष्मण' बन गए और उनका करियर हमेशा के लिए बदल गया।
लक्ष्मण की भूमिका को शानदार तरीके से निभाकर घर-घर लोकप्रिय हुए सुनील लहरी का शुरुआती करियर आसान नहीं था, बल्कि संघर्षों से भरा था। वह विभिन्न दफ्तरों में जाकर ऑडिशन देते रहे, लेकिन अक्सर रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। ऐसे कठिन समय में उनका सबसे सच्चा साथी एक पुराना टेप रिकॉर्डर था। सुनील ने सोशल मीडिया पर इस बारे में अपने प्रशंसकों को बताया।
जब भी वह निराश होते, तो टेप रिकॉर्डर में कैसेट लगाकर गाने सुनते। उनका पसंदीदा गाना 'ओ राही चल' था, जो उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता था। सुनील ने कहा कि संघर्ष के दिनों में टेप रिकॉर्डर ने उनका बहुत साथ दिया और आज भी वह उनके साथ है।
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