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क्या है 'मास्टरशेफ इंडिया' के नए सीजन में मनीषा की प्रेरणादायक कहानी?

मास्टरशेफ इंडिया के 9वें सीजन में मनीषा की कहानी ने सभी को भावुक कर दिया है। 14 साल की उम्र में कोमा में जाने के बाद भी, मनीषा ने कुकिंग को अपनी थेरेपी मानते हुए बेहतरीन डिश तैयार की। जानें कैसे उन्होंने जजों को प्रभावित किया और शो की नई थीम के बारे में।
 
क्या है 'मास्टरशेफ इंडिया' के नए सीजन में मनीषा की प्रेरणादायक कहानी?

मास्टरशेफ इंडिया का नया सीजन शुरू


मुंबई, 8 जनवरी। लोकप्रिय टीवी शो 'मास्टरशेफ इंडिया' का 9वां सीजन अब शुरू हो चुका है। इस समय शो के ऑडिशन चल रहे हैं, जहां प्रतिभाशाली प्रतियोगियों की भरमार है।


हाल ही में शो में एक ऐसी जोड़ी की एंट्री हुई है, जिसने अपने हुनर से जजों को आंसू बहाने पर मजबूर कर दिया। जहां शो में बेहतरीन खाने की खोज की जा रही है, वहीं प्रतियोगियों की संघर्ष की कहानियां भी दर्शकों और जजों को भावुक कर रही हैं।


एक नए प्रोमो में एक प्रतियोगी को दिखाया गया है, जो मानसिक और शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन जब वह किचन में आती हैं, तो अपनी सभी कमजोरियों को पीछे छोड़ देती हैं। हम बात कर रहे हैं मनीषा की, जो 14 साल की उम्र में कोमा में चली गई थीं और दवाओं के कारण सेकेंडरी पार्किंसन से ग्रस्त हो गईं।


इस बीमारी के कारण मांसपेशियां कठोर हो जाती हैं और शरीर कांपने लगता है। लेकिन जब मनीषा मास्टरशेफ की किचन में खाना बनाती हैं, तो वह अपने शरीर पर नियंत्रण पा लेती हैं और मेहनत से बेहतरीन डिश तैयार करती हैं।


मनीषा की हिम्मत और मेहनत को देखकर जज रणवीर बरार, कुणाल कपूर और विकास खन्ना भी भावुक हो जाते हैं और उन्हें जीत का एप्रन पहनाते हैं। जज रणवीर बरार मनीषा की प्रेरणा से इतने प्रभावित होते हैं कि वह उनके लिए एक कविता भी सुनाते हैं।


मनीषा प्रोमो में बताती हैं कि वह कुकिंग को अपनी थेरेपी मानती हैं, क्योंकि इस दौरान वह केवल खाने के स्वाद पर ध्यान केंद्रित करती हैं और उनका मन शांत हो जाता है।


शो 5 जनवरी से सोनी टीवी पर प्रसारित हो रहा है और जल्द ही सभी प्रतियोगियों के बीच अगला राउंड 'अग्निपरीक्षा' भी होने वाला है। इस बार शो की थीम देश के देसी खाने को नया रूप देना है, जिसमें सभी प्रतियोगी देसी व्यंजनों के साथ प्रयोग करते नजर आएंगे.


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