प्रियंशी यादव की अदाकारी का सफर: कैसे एक निर्देशक ने बदली उनकी सोच?
प्रियंशी यादव का प्रेरणादायक सफर
मुंबई, 28 जुलाई। प्रियंशी यादव ने टेलीविजन की दुनिया में अपनी एक खास पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है। उन्होंने अपने करियर में कई भूमिकाएं निभाई हैं और हर प्रोजेक्ट से कुछ नया सीखने का प्रयास किया है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर, उन्होंने उस व्यक्ति का जिक्र किया, जिसने उन्हें न केवल एक बेहतर कलाकार बनने में मदद की, बल्कि एक इंसान के रूप में भी उन्हें संवारा।
जब प्रियंशी से पूछा गया कि कौन सा किरदार या अनुभव उनके लिए सबसे transformative रहा, तो उन्होंने कहा, ''मैंने जिन भी शो में काम किया है, उन सभी से मैंने कुछ नया सीखा है। हर अनुभव ने मुझे आगे बढ़ने में मदद की है। रोहित राज गोयल के साथ काम करना मेरे लिए सबसे बेहतरीन अनुभवों में से एक रहा है। उन्होंने मुझे किरदार को समझने, उसे स्वाभाविकता से निभाने और सबसे महत्वपूर्ण बात, किरदार को सिर्फ परफॉर्म नहीं, बल्कि उसे जीने की कला सिखाई।''
उन्होंने आगे कहा कि एक कलाकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वह अपने किरदार के प्रति ईमानदार रहे। रोहित राज गोयल ने उन्हें यह समझाया कि किसी भी दृश्य को करते समय, कलाकार को केवल अपनी लाइनें बोलने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि उस किरदार की भावनाओं को भी महसूस करना चाहिए। यही अभिनय को विशेष बनाता है।
प्रियंशी ने साझा किया, ''शुरुआत में, मैं कई बार शूटिंग से पहले बहुत घबरा जाती थी। किसी दृश्य को करने से पहले चिंता होती थी और मैं नर्वस महसूस करती थी। तब रोहित ने मुझे एक सलाह दी, जिसने मेरी सोचने का तरीका बदल दिया। उन्होंने कहा कि जिस दिन आप अंदर से घबराहट और बेहतर करने की इच्छा को पूरी तरह खत्म कर देंगे, उस दिन आप एक अच्छे कलाकार नहीं बन पाएंगे। एक अभिनेता के अंदर हमेशा यह भावना रहनी चाहिए कि वह अपने काम को और बेहतर कर सकता है।''
उन्होंने कहा, ''यह सीख मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक रही। नर्वस होना या किसी दृश्य को लेकर चिंतित होना गलत नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि कलाकार अपने काम को लेकर गंभीर है। लेकिन, उस डर को संभालकर अपने अभिनय में ईमानदारी लाना आवश्यक है।''
वर्तमान में, प्रियंशी यादव जी टीवी के शो 'तुझसे है राब्ता दिल में' में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जहां वह वृंदा का किरदार निभा रही हैं। इस शो की कहानी तीन किरदारों संजय, स्वाति और वृंदा के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी राहें आपस में जुड़ती हैं और रिश्तों, भावनाओं और कई उतार-चढ़ाव से भरा सफर शुरू होता है।
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