क्यों गणेश चतुर्थी पर कुशाग्रे दुआ का है खास जुड़ाव? जानें उनकी आस्था की कहानी!
कुशाग्रे दुआ की गणेश चतुर्थी पर आस्था
मुंबई, 11 सितंबर। 'क्योंकि रिश्तों के भी रूप बदलते हैं' के मशहूर टीवी अभिनेता कुशाग्रे दुआ ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर अपने गहरे जुड़ाव और भगवान गणेश के प्रति अपनी आस्था के बारे में खुलकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि उनके जीवन में कई ऐसे क्षण आए हैं जब चीजें उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहीं, लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि शायद उनके लिए कुछ और बेहतर लिखा गया था। कठिन समय में उन्हें हमेशा गणपति बप्पा का आशीर्वाद और मार्गदर्शन महसूस हुआ है।
कुशाग्रे ने अपने विश्वास के बारे में कहा, ''कई बार ऐसा हुआ है जब चीजें मेरे अनुसार नहीं चलीं। उस समय मुझे निराशा हुई, लेकिन जब मैंने पीछे मुड़कर देखा, तो समझा कि उन परिस्थितियों के बाद हमेशा कुछ बेहतर मेरा इंतजार कर रहा था। इन कठिन पलों में बप्पा का आशीर्वाद मुझे सही दिशा दिखाता है।''
उन्होंने आगे कहा, ''बप्पा की उपस्थिति मुझे जीवन के सफर में विश्वास रखने, धैर्य बनाए रखने और कठिन समय में भी आगे बढ़ने का साहस देती है। उनके प्रति मेरी आस्था मुझे नई ऊर्जा प्रदान करती है। गणेश चतुर्थी मेरे लिए सकारात्मकता और अपनों के साथ खुशियां बांटने का अवसर है।''
कुशाग्रे ने साझा किया, ''मेरा परिवार मुंबई से दूर है, इसलिए मेरे दोस्त मेरे परिवार की तरह हैं। दोस्तों के साथ बप्पा को घर लाना, उनकी सजावट करना और त्योहार की खुशियों का आनंद लेना मेरे लिए इसे और खास बनाता है। इस त्योहार की असली सुंदरता प्यार और एकता में है।''
गौरतलब है कि कुशाग्रे दुआ 'उड़ारियां', 'ये है चाहतें', 'बहुत प्यार करते हैं', 'गुम है किसी के प्यार में', 'मेहंदी है रचने वाली' और 'उड़ती का नाम राज्जो' जैसे कई टीवी शो में नजर आ चुके हैं।
अपनी अभिनय यात्रा से मिली सीख के बारे में उन्होंने कहा, ''इस दौरान मुझे सबसे महत्वपूर्ण सीख धैर्य रखना और जमीन से जुड़े रहना है। अभिनय कोई ऐसी मंजिल नहीं है जहां पहुंचने के बाद सफर खत्म हो जाए, बल्कि यह एक निरंतर सीखने और खुद को बेहतर बनाने की यात्रा है। इस दौरान कलाकार को ऑडिशन, रिजेक्शन, उतार-चढ़ाव और छोटी-छोटी सफलताओं का सामना करना पड़ता है। बप्पा मुझे इन सभी परिस्थितियों में विनम्र बने रहने और ईमानदारी से मेहनत करते रहने की प्रेरणा देते हैं। सही समय पर चीजें अपने आप बेहतर होने लगती हैं। आस्था और मेहनत के साथ अंततः सब कुछ अपनी सही जगह पर आ जाता है।''
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