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क्या है 'मास्टर शेफ इंडिया' में नेत्रहीन महिला की प्रेरणादायक कहानी?

टीवी शो 'मास्टर शेफ इंडिया' में एक नेत्रहीन महिला की प्रेरणादायक कहानी ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। इस शो में प्रतिभागी अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद बेहतरीन खाना बना रहे हैं। जानें कैसे इस महिला ने अपनी कुकिंग के जरिए जजों को प्रभावित किया और अपनी कठिनाइयों का सामना किया।
 
क्या है 'मास्टर शेफ इंडिया' में नेत्रहीन महिला की प्रेरणादायक कहानी?

नेत्रहीन महिला की अद्भुत कुकिंग यात्रा


मुंबई, 11 जनवरी। टीवी का बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम 'मास्टर शेफ इंडिया' दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना चुका है। इस शो में प्रतिभाशाली जोड़ियों को देखा जा रहा है, जो अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद बेहतरीन खाना बना रही हैं।


हाल ही में एक ऐसा जोड़ा शो में नजर आया, जिसमें एक महिला नेत्रहीन है, लेकिन उसके द्वारा बनाए गए व्यंजन जजों के दिलों में बस गए हैं। शो का नया प्रोमो दर्शकों को भावुक कर रहा है।


सोनी टीवी ने 'मास्टर शेफ इंडिया' का एक नया प्रोमो जारी किया है, जिसमें एक नेत्रहीन महिला अपने साथी के साथ नजर आ रही हैं, लेकिन कुकिंग का कार्य वह अकेले ही करती हैं। जब जज रणवीर बरार ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने कुकिंग छोड़ने का सोचा था, तो उन्होंने बताया कि आंखों की रोशनी खोने के बाद भी वह कुकिंग नहीं छोड़ सकती थीं। महिला ने कहा कि वह अपने परिवार के लिए खाना बनाती हैं और कई चुनौतियों का सामना करती हैं, लेकिन उन्होंने किचन को इस तरह से व्यवस्थित किया है कि उन्हें पता है कि कौन सी चीज कहां रखी है।


उन्होंने यह भी बताया कि अगर घर का कोई सदस्य थोड़ी भी फेरबदल करता है, तो उन्हें बहुत कठिनाई होती है। नेत्रहीन प्रतियोगी की कहानी सुनकर जज कुणाल कपूर, रणवीर बरार और विकास खन्ना सभी भावुक हो जाते हैं और उनके द्वारा बनाए गए खाने की सराहना करते हैं। रणवीर ने कहा कि वह उन्हें मास्टर शेफ की किचन में खाना बनाते हुए देखना चाहते हैं।


यह पहली बार नहीं है जब शो में शारीरिक रूप से असक्षम प्रतिभागियों ने अपनी हिम्मत और कौशल से दर्शकों का दिल जीता है। इससे पहले, मनीषा नाम की एक प्रतियोगी ने भी जजों को भावुक कर दिया था। मनीषा सेकेंडरी पार्किंसनिज्म से पीड़ित थीं और उनके शरीर में कंपन होती थी, लेकिन जब वह चाकू उठाती थीं, तो उनकी कंपन कम हो जाती थी। मनीषा का मानना था कि कुकिंग उनके लिए एक प्रकार की थेरेपी है। मनीषा 14 साल की उम्र में कोमा में चली गई थीं और दवाओं के ओवरडोज के कारण वह सेकेंडरी पार्किंसनिज्म से ग्रसित हो गईं।


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