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क्या है 'जगद्धात्री' की सयंतनी घोष का न्याय और बदले पर नजरिया?

अभिनेत्री सयंतनी घोष ने अपने धारावाहिक 'जगद्धात्री' में निभाए जा रहे किरदार 'माया देशमुख' के माध्यम से न्याय और बदले के बीच की बारीकियों पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे न्याय और बदला एक ही सिक्के के दो पहलू हो सकते हैं और समाज में नियमों और व्यक्तिगत भावनाओं के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। जानें उनके विचार और किरदार के बारे में और भी जानकारी।
 

सयंतनी घोष का किरदार और विचार




मुंबई, 1 नवंबर। अभिनेत्री सयंतनी घोष, जो कि धारावाहिक 'जगद्धात्री' में 'माया देशमुख' का किरदार निभा रही हैं, ने न्याय और बदले के बीच की बारीकियों पर अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि न्याय और बदला एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, लेकिन इन दोनों के बीच की रेखा बहुत पतली होती है।


उन्होंने कहा, "जब लोग महसूस करते हैं कि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उनकी भावनाएं उन्हें बदला लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। कानूनी दृष्टिकोण से, एक व्यक्ति को सजा मिलना न्याय हो सकता है, लेकिन पीड़ित की भावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।"


सयंतनी ने यह भी बताया कि कभी-कभी यह समझना मुश्किल होता है कि न्याय कब समाप्त होता है और बदला कब शुरू होता है। "मैं मानती हूं कि नियमों और व्यक्तिगत भावनाओं के बीच संतुलन होना चाहिए। कुछ नियमों पर बहस नहीं की जा सकती, लेकिन समाज को चलाने के लिए अनुशासन आवश्यक है।"


उन्होंने यह सुझाव दिया कि लोगों को सामाजिक अपेक्षाओं पर सवाल उठाना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि उनके लिए क्या सही है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बगावत सिर्फ बगावती होने के लिए नहीं होनी चाहिए।


अपने किरदार के बारे में बात करते हुए, सयंतनी ने कहा, "मुझे लगता है कि माया में मेरे व्यक्तित्व के कुछ पहलू हैं, लेकिन वह मुझे भी प्रभावित करती है। लंबे समय तक एक किरदार निभाने से कभी-कभी असली व्यक्ति और किरदार के बीच की सीमाएं धुंधली हो जाती हैं।"


उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के रूप में, वे हमेशा अपने निभाए किरदारों से कुछ न कुछ सीखते हैं, जो उन्हें नए दृष्टिकोणों की खोज करने का अवसर देते हैं।


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