क्या दहेज प्रथा पर सवाल उठाएगा 'गंगा माई की बेटियां'? शुभांगी लाटकर ने साझा की अपनी राय
दहेज प्रथा पर गंभीर चर्चा
मुंबई, 18 मार्च। भारतीय समाज में दहेज प्रथा एक ऐसी समस्या है, जो भले ही समय के साथ कम हुई है, लेकिन अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। कई परिवार इसे परंपरा के नाम पर निभाते हैं, जिससे लड़कियों और उनके परिवारों को मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस मुद्दे को उजागर करने के लिए टीवी शोज और फिल्मों का सहारा लिया जा रहा है। इसी संदर्भ में, 'गंगा माई की बेटियां' नामक शो में इस गंभीर सामाजिक समस्या को उठाया जा रहा है। शो में गंगा माई का किरदार निभाने वाली शुभांगी लाटकर ने दहेज प्रथा और उससे जुड़े दबावों पर अपनी स्पष्ट राय रखी।
हाल के एपिसोड में, गंगा माई को अपनी बेटी समान साहना की शादी के लिए भारी दहेज की मांग पूरी करनी पड़ती है, जिसके चलते उन्हें अपना घर गिरवी रखना पड़ता है। यह दृश्य दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि आज भी समाज में ऐसी स्थितियां विद्यमान हैं।
शुभांगी लाटकर ने अपने किरदार के बारे में बात करते हुए कहा, 'मैं गंगा माई की मजबूरी और उसकी आंतरिक ताकत को ईमानदारी से दर्शाने की कोशिश कर रही हूं। यह कहानी हमें यह एहसास कराती है कि दहेज जैसी प्रथाएं समाज में कितनी गहराई से जड़ें जमा चुकी हैं, लेकिन यह भी दिखाती है कि अगर हिम्मत हो तो बदलाव संभव है और गलत के खिलाफ आवाज उठाई जा सकती है।'
एक मां के रूप में, शुभांगी ने अपनी सोच साझा की। उन्होंने कहा, 'मैं अपनी बेटी को हमेशा यह सिखाती हूं कि खुद का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी रिश्ते में अपनी इज्जत से समझौता नहीं करना चाहिए। हर लड़की को यह समझना चाहिए कि उसे बिना किसी शर्त के प्यार और सम्मान मिलना चाहिए। अगर कोई स्थिति इसके खिलाफ हो, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना सही कदम है।'
शो में शीजान खान और अमनदीप सिद्धू भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह शो लगातार ऐसे मुद्दों को उठाता रहा है जो समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं। आने वाले एपिसोड्स में दर्शक देखेंगे कि गंगा माई, साहना और स्नेहा मिलकर दहेज के खिलाफ एक मजबूत कदम उठाती हैं। इसके साथ ही कहानी में एक नया मोड़ भी आएगा, जहां दुर्गावती को यह सच्चाई पता चलेगी कि सिद्धू किसी और से प्यार करता है।
'गंगा माई की बेटियां', जो जी टीवी पर प्रसारित हो रहा है, दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि बदलाव की शुरुआत घर से ही होनी चाहिए।
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