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क्या 'अनुपमा' में घरेलू हिंसा पर बात करना है जरूरी? अद्रिजा रॉय ने किया खुलासा

अद्रिजा रॉय, जो 'अनुपमा' में राही कपाड़िया का किरदार निभा रही हैं, ने शो में चल रहे पुरुषों पर घरेलू हिंसा के ट्रैक पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस मुद्दे की गंभीरता को उजागर करते हुए कहा कि टेलीविजन पर ऐसे संवेदनशील विषयों को उठाना आवश्यक है। अद्रिजा ने बताया कि कैसे 'अनुपमा' जैसे शो दर्शकों को हिम्मत देते हैं और उन्हें यह महसूस कराते हैं कि वे अकेले नहीं हैं। जानें अद्रिजा ने और क्या कहा!
 
क्या 'अनुपमा' में घरेलू हिंसा पर बात करना है जरूरी? अद्रिजा रॉय ने किया खुलासा

अद्रिजा रॉय का घरेलू हिंसा पर विचार


मुंबई, 21 फरवरी। टीवी धारावाहिक 'अनुपमा' में राही कपाड़िया की भूमिका निभाने वाली अद्रिजा रॉय ने हाल ही में शो में चल रहे पुरुषों पर घरेलू हिंसा के ट्रैक पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे ऐसे संवेदनशील मुद्दों को उजागर करने वाले शो का हिस्सा हैं।


अद्रिजा ने कहा, “टेलीविजन पर महत्वपूर्ण चर्चाओं को शुरू करने की क्षमता होती है। ‘अनुपमा’ जैसे लोकप्रिय शो वास्तविक सामाजिक मुद्दों को दर्शाकर जागरूकता फैलाते हैं। घरेलू हिंसा के बारे में अक्सर महिलाओं की कहानियां सुनाई जाती हैं, जो एक गंभीर विषय है। लेकिन यह भी सच है कि पुरुष भी शारीरिक और मानसिक शोषण का शिकार होते हैं। अक्सर वे चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें शर्मिंदगी या समाज के जज होने का डर होता है।”


उन्होंने इस पहलू को मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। अद्रिजा को ‘अनुपमा’ के निर्माताओं की सबसे अच्छी बात यह लगती है कि वे सामाजिक मुद्दों को केवल ड्रामा के लिए नहीं लाते, बल्कि हर ट्रैक के माध्यम से सकारात्मक और अर्थपूर्ण संदेश देते हैं।


अद्रिजा ने आगे कहा, “निर्माता अपनी कहानियों को बहुत ध्यान से चुनते हैं। हर ट्रैक का असली जीवन से संबंध होता है – कुछ ऐसा जो लोग अपने घरों या रिश्तों में रोज अनुभव करते हैं। ‘अनुपमा’ जैसे शो उन लोगों को हिम्मत देते हैं जो ऐसे हालात में अकेले परेशान होते हैं। जब दर्शक स्क्रीन पर ऐसी कहानियां देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि वे अकेले नहीं हैं। इससे उन्हें बोलने या मदद मांगने की हिम्मत मिलती है। यही कहानी कहने की असली ताकत है।”


अभिनेत्री का मानना है कि एक्टर्स और क्रिएटर्स की जिम्मेदारी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म का समझदारी से उपयोग करें। उन्होंने कहा, “अगर हम किसी की जिंदगी में थोड़ा सा भी बदलाव ला सकें या उन्हें यह महसूस करा सकें कि उनकी बात सुनी जा रही है, तो हमारा काम सार्थक हो जाता है। मुझे गर्व है कि हमारा शो रोजमर्रा के उन मुद्दों को दिखाता है जो होते तो बहुत हैं, लेकिन जिन पर खुलकर बात कम होती है।”


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