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अंगद हसीजा का टेलीविजन इंडस्ट्री पर नजरिया: क्या बदल गया है सब कुछ?

अंगद हसीजा, जो वर्तमान में 'तुमसे तुम तक' में यशवर्धन का किरदार निभा रहे हैं, ने टेलीविजन इंडस्ट्री में आए बदलावों पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे आज के निर्देशकों की स्पष्टता और प्रतिस्पर्धा ने टेलीविजन को नया रूप दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने के अनुभव को भी साझा किया, जिसमें उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। जानें उनके विचार और टेलीविजन की दुनिया में क्या नया है।
 

अंगद हसीजा की नई भूमिका और टेलीविजन में बदलाव




मुंबई, 12 अगस्त। अभिनेता अंगद हसीजा वर्तमान में टीवी शो 'तुमसे तुम तक' में यशवर्धन के किरदार में दिखाई दे रहे हैं। उनका मानना है कि टेलीविजन क्षेत्र में अवसरों में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि आजकल के निर्देशकों को स्पष्टता है कि उन्हें किस प्रकार के शॉट्स चाहिए और उन्हें कैसे फिल्माना है।


अंगद ने कहा, "टेलीविजन इंडस्ट्री में पहले की तुलना में काफी प्रगति हुई है। हालांकि, मुझे यह महसूस होता है कि पहले लंबे समय तक चलने वाले शो होते थे, जो चार या पांच साल तक चलते थे। अब वे उतने लंबे नहीं होते। आजकल दर्शकों को विभिन्न प्रकार के शो देखने को मिलते हैं। पहले इतना प्रतिस्पर्धा नहीं था, लेकिन अब वर्टिकल शो और वेब सीरीज भी आ गई हैं। मुझे लगता है कि हर चीज में सकारात्मकता ढूंढनी चाहिए, अन्यथा हर चीज में कुछ न कुछ नकारात्मकता ही मिलेगी।"


उन्होंने आगे कहा, "एक समय था जब टेलीविजन इंडस्ट्री आज की तरह नहीं थी। चैनल अब यह समझने के लिए शोध करते हैं कि उनके आस-पास क्या चल रहा है और उसी के अनुसार कहानियाँ प्रस्तुत करते हैं। पहले और अब में स्पष्ट अंतर है। पहले एक सामान्य प्रकार का ड्रामा होता था, जबकि अब टेलीविजन कुछ नया दिखाने की कोशिश कर रहा है।"


जब उनसे पूछा गया कि मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण किरदार निभाना कितना कठिन है, तो उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि प्रदर्शन ऐसा होना चाहिए कि वह ओवरएक्टिंग जैसा न लगे। ऐसा किरदार निभाना कठिन है और दर्शकों तक इसे सही तरीके से पहुंचाना और भी चुनौतीपूर्ण है। यदि आप ऐसा किरदार निभा रहे हैं, तो दर्शकों को इसे अपनाना चाहिए। मेरे पहले शो में मैंने ऐसा किरदार निभाया था, जिसके लिए मुझे बहुत सराहना मिली थी। उस किरदार को निभाने के लिए मुझे काफी शोध करना पड़ा था। मैंने ऐसे लोगों से मुलाकात की जो मानसिक रूप से परेशान थे और उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी का अध्ययन किया। मैंने देखा कि वे बोलते समय कैसे अटकते थे और डरने पर कैसे प्रतिक्रिया करते थे।"


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