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क्या आप जानते हैं एआर रहमान की प्रेरणादायक यात्रा? जानें उनके संघर्ष और सफलता की कहानी!

एआर रहमान, जिनका जन्म 6 जनवरी 1967 को तमिलनाडु में हुआ, ने अपने करियर की शुरुआत एक छोटे से होम रिकॉर्डिंग स्टूडियो से की। उनके पिता का निधन और परिवार की आर्थिक स्थिति ने उन्हें कठिनाइयों का सामना करने पर मजबूर किया। लेकिन रहमान ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से संगीत की दुनिया में एक अद्वितीय पहचान बनाई। जानें उनकी प्रेरणादायक यात्रा के बारे में, जिसमें उन्होंने कई पुरस्कार जीते और वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि हासिल की।
 
क्या आप जानते हैं एआर रहमान की प्रेरणादायक यात्रा? जानें उनके संघर्ष और सफलता की कहानी!

एआर रहमान: संगीत की दुनिया का सितारा


मुंबई, 5 जनवरी। एआर रहमान का नाम आज संगीत की दुनिया में एक चमकते सितारे की तरह है। उनकी रचनाएँ हर किसी के दिल को छू जाती हैं और उनकी यात्रा कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। रहमान ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अपनी प्रतिभा और मेहनत से उन्होंने हर बाधा को पार किया। उन्होंने अपने घर के आंगन में एक छोटा सा होम रिकॉर्डिंग स्टूडियो स्थापित किया, जो उनके करियर की शुरुआत का आधार बना।


एआर रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 को तमिलनाडु में हुआ। उनका असली नाम ए.एस. दिलीप कुमार था। उनके पिता, आर.के. शेखर, मलयालम फिल्मों के जाने-माने संगीतकार थे। रहमान ने चार साल की उम्र में पियानो बजाना सीखा। उनकी मां भी संगीत में रुचि रखती थीं। हालांकि, उनके जीवन में कठिनाइयाँ आईं, जब उनके पिता का निधन हो गया और घर की जिम्मेदारियाँ उन पर आ गईं।


पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई, जिससे उन्हें 15 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। घर चलाने के लिए उन्होंने अपने पिता के संगीत वाद्ययंत्रों को किराए पर देना शुरू किया। इस काम से उन्हें पहली बार 50 रुपए कमाए, जो उनके जीवन की पहली सफलता थी।


20 साल की उम्र में, रहमान ने इस्लाम कबूल किया और अपना नाम अल्लाह रक्खा रहमान रखा। यह निर्णय उनकी छोटी बहन की बीमारी के कारण लिया गया था, जिसके ठीक होने के बाद उन्होंने अपनी आस्था को नया मोड़ दिया।


रहमान का करियर शुरुआत में साधारण था, लेकिन मणिरत्नम की फिल्म 'रोजा' में संगीत देने का मौका मिलने के बाद उनकी पहचान बनी। इस फिल्म के गाने हिट हुए और रहमान का नाम संगीत की दुनिया में फैल गया।


उनकी यात्रा एक छोटे से होम रिकॉर्डिंग स्टूडियो से शुरू हुई, जो बाद में उनकी सफलता का प्रतीक बन गया। इसके बाद उन्होंने कई बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों में काम किया, जिनमें 'रंगीला', 'ताल', 'लगान', 'स्वदेश', 'रंग दे बसंती', और 'स्लमडॉग मिलेनियर' शामिल हैं।


रहमान को उनके काम के लिए कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें दो ऑस्कर, दो ग्रैमी, एक गोल्डन ग्लोब, छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 15 फिल्मफेयर पुरस्कार शामिल हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया है। उनके गाने न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पसंद किए जाते हैं।


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