विक्रम भट्ट का हॉरर फिल्मों के प्रति जुनून: डर की गहराई में छिपे भावनाओं का राज़
विक्रम भट्ट का हॉरर फिल्मों में गहरा लगाव
मुंबई, 12 जून। जब भी हॉरर फिल्मों का जिक्र होता है, तो विक्रम भट्ट का नाम अवश्य लिया जाता है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसी फिल्में बनाई हैं, जो दर्शकों को न केवल डराती हैं, बल्कि उन्हें सोचने पर भी मजबूर करती हैं। उनकी नई फिल्म 'हॉन्टेड 3डी' अब सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो चुकी है। फिल्म के प्रचार के दौरान, विक्रम भट्ट ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें डर और हॉरर कहानियों में इतनी रुचि क्यों है।
विक्रम भट्ट ने कहा, "मुझे लगता है कि डर ही अन्य सभी भावनाओं की नींव है। जब किसी व्यक्ति को अपने प्रिय को खोने का डर होता है, तो यह भावना उसे अधिकार जताने के लिए प्रेरित करती है। इसी तरह, अगर किसी को लगता है कि उसके पास पर्याप्त चीजें नहीं हैं, तो यह डर लालच का रूप ले लेता है। अकेलेपन का डर लोगों को रिश्ते बनाने के लिए प्रेरित करता है और पीछे छूट जाने का डर उन्हें प्रतिस्पर्धा में शामिल करता है।"
उन्होंने आगे कहा, "लोग इन भावनाओं को विभिन्न नाम देते हैं, लेकिन गहराई से देखने पर, इनका मूल कारण डर ही होता है। दुनिया में बहुत से लोग किसी न किसी डर के साथ जी रहे हैं, लेकिन उन्हें यह एहसास नहीं होता कि उनकी कई भावनाओं की असली वजह डर है।"
विक्रम भट्ट ने यह भी बताया कि न केवल इंसान, बल्कि पूरा जीव-जगत डर के आधार पर चलता है। डर जीवन के लिए आवश्यक है। अगर कोई व्यक्ति खतरनाक जानवर को देखकर नहीं डरेगा, तो उसकी जान खतरे में पड़ सकती है। यही डर उसे सतर्क रहने और सुरक्षित रहने का मार्ग दिखाता है।
निर्देशक ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में उन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया है, जिन पर लोग खुलकर बात नहीं करते। उनकी फिल्मों में अक्सर रिश्तों की जटिलताएं, मानव मन का अंधेरा पक्ष और छिपी हुई भावनाएं देखने को मिलती हैं।
विक्रम भट्ट ने कहा, "इंसान की असली पहचान कई बार उसके इंटरनेट पर किए गए सर्च से समझी जा सकती है। लोग दुनिया के सामने एक चेहरा दिखाते हैं, लेकिन उनके मन में कई ऐसे सवाल, इच्छाएं और डर होते हैं, जिन्हें वे किसी से साझा नहीं करते। हर व्यक्ति के अंदर एक ऐसा पक्ष छिपा होता है जिसे दुनिया नहीं जानती और उन्हें उसी पक्ष को समझना और अपनी फिल्मों में दिखाना पसंद है।"
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