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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र ने 'फौजी' फिल्म पर उठाए सवाल, ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ने का आरोप

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने फिल्म 'फौजी' के निर्देशक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म में नेताजी और हिटलर की मुलाकात को गलत तरीके से दर्शाया गया है, जिससे नेताजी की छवि को नुकसान पहुंचता है। चंद्र कुमार बोस ने निर्देशक से माफी मांगने की अपील की है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और नेताजी के ऐतिहासिक संदर्भ को कैसे पेश किया गया है।
 

फिल्म 'फौजी' पर चंद्र कुमार बोस की तीखी प्रतिक्रिया




कोलकाता, 25 अक्टूबर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने हाल ही में रिलीज होने वाली फिल्म 'फौजी' के निर्देशक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फिल्म में नेताजी और एडोल्फ हिटलर की मुलाकात को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने निर्देशक से अपील की है कि वे देशवासियों से माफी मांगें।


चंद्र कुमार बोस ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फिल्मकारों को स्वतंत्रता संग्राम और उसके नायकों को दिखाने का अधिकार है, लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।


उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय नायकों से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना और कल्पना का सहारा लेना एक गंभीर अपराध है।" उनका आरोप है कि फिल्म में नेताजी और हिटलर की मुलाकात को गलत तरीके से दर्शाया गया है, जिससे नेताजी की छवि को नुकसान पहुंचता है।


नेताजी और हिटलर की मुलाकात के ऐतिहासिक संदर्भ पर चर्चा करते हुए चंद्र कुमार बोस ने बताया कि नेताजी ने भारत की आजादी के लिए समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य से हिटलर से मुलाकात की थी।


उन्होंने कहा, "नेताजी का मानना था कि उस समय जर्मनी के हिटलर और जापान के हिदेकी तोजो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में मदद कर सकते थे।"


चंद्र कुमार बोस ने यह भी स्पष्ट किया कि नेताजी फासीवाद के कट्टर विरोधी थे और लोकतंत्र में विश्वास रखते थे।


उनके अनुसार, नेताजी ने हिटलर के साथ कभी भी अधीनता का व्यवहार नहीं किया, बल्कि बराबरी के स्तर पर बातचीत की और भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्थन मांगा। उन्होंने यह भी कहा कि हिटलर ने नेताजी के देशप्रेम को पहचाना और समर्थन देने पर सहमति जताई थी।


चंद्र कुमार बोस ने हिटलर की आत्मकथा 'मीन कैम्फ' का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें भारत के प्रति उसके विचार यह दर्शाते हैं कि उसे भारत की संस्कृति और विरासत की सही समझ नहीं थी।


उन्होंने कहा कि दोनों नेता अपने-अपने देशों के हितों के लिए काम कर रहे थे, लेकिन बाद में हिटलर सत्ता के अहंकार में डूब गया।


चंद्र कुमार बोस ने आरोप लगाया कि फिल्म 'फौजी' के निर्देशक ने ऐतिहासिक तथ्यों को सही संदर्भ में दिखाने के बजाय विवाद पैदा करने के लिए नेताजी और हिटलर की मुलाकात को सनसनीखेज तरीके से पेश किया है।


उन्होंने कहा कि नेताजी का व्यक्तित्व बहुत महान था और उन्हें इस तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए जिससे उनकी छवि छोटी लगे। उनके अनुसार, फिल्म में नेताजी और हिटलर के संबंधों की वास्तविकता को सही ढंग से नहीं दर्शाया गया है।


उन्होंने कहा, "निर्देशक को भारत की जनता और उन सभी लोगों से माफी मांगनी चाहिए जो देश के स्वतंत्रता संग्राम का सम्मान करते हैं।"


फिल्म के ट्रेलर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि इसमें अभिनेता प्रभास द्वारा निभाए गए काल्पनिक किरदार को नेताजी द्वारा हिटलर से परिचय कराते हुए दिखाया गया है, जिससे काल्पनिक पात्र को अधिक महत्व और नेताजी की ऐतिहासिक भूमिका को कमतर दिखाने की कोशिश की गई है।


'फौजी' एक पीरियड वॉर-एक्शन फिल्म है, जिसका निर्देशन और लेखन हनु राघवपुड़ी ने किया है।


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