जुथिका रॉय: भक्ति संगीत की अमर आवाज, जिनकी पुण्यतिथि पर याद किया जाएगा उनका योगदान
भक्ति संगीत की रानी जुथिका रॉय
नई दिल्ली, 4 फरवरी। 'घूंघट के पट खोल' से लेकर 'पग घुंघरू बांध मीरा नाची' तक, जुथिका रॉय ने भक्ति संगीत की दुनिया में अपनी अनोखी आवाज से एक विशेष स्थान बनाया। उनकी पुण्यतिथि 5 फरवरी को है।
जुथिका रॉय ने भक्ति संगीत में 200 से अधिक हिंदी और 100 से ज्यादा बांग्ला गाने गाए। उनके प्रसिद्ध भजनों में 'घूंघट के पट खोल रे' और 'पग घुंघरू बांध मीरा नाची रे' आज भी लोगों के दिलों में गूंजते हैं।
जुथिका का जन्म 20 अप्रैल 1929 को कोलकाता में हुआ। केवल 12 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला एलबम रिकॉर्ड किया, जो उस समय की सबसे कम उम्र की रिकॉर्डिंग मानी जाती थी। संगीत के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था।
उनकी आवाज में भक्ति, सरलता और गहराई का अद्भुत संगम था। मीरा के भजनों को उन्होंने इस तरह गाया कि श्रोता भावुक हो जाते थे। 'घूंघट के पट खोल रे', 'पग घुंघरू बांध मीरा नाची रे', और 'मैं तो गिरधर के रंग रंगी' जैसे भजन उनकी आवाज में अमर हो गए।
जुथिका ने हिंदी के साथ-साथ बांग्ला में भी कई सुंदर भक्ति गीत गाए। उनकी बांग्ला भक्ति गीतों में भी वही मिठास और भक्ति भाव देखने को मिलता था। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के गीतों को भी अपनी आवाज दी।
उन्होंने कई फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग भी की। जुथिका रॉय ने संगीत के क्षेत्र में 50 वर्षों से अधिक समय तक सक्रिय रहकर लाखों श्रोताओं के दिलों में अपनी जगह बनाई।
15 अगस्त 1947 को, जब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा फहराने जा रहे थे, उस समय ऑल इंडिया रेडियो पर जुथिका रॉय के भजन प्रसारित हो रहे थे।
इंदिरा गांधी भी जुथिका के भजनों की बड़ी प्रशंसक थीं। 1946 में, गांधीजी ने बंगाल के सांप्रदायिक तनाव के बीच कोलकाता में भाषण से पहले जुथिका से गाने के लिए कहा।
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