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परेश रावल का 71वां जन्मदिन: जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता परेश रावल आज 71 वर्ष के हो गए हैं। उनके जन्मदिन के अवसर पर, हम उनके जीवन की कुछ रोचक बातें साझा कर रहे हैं। परेश रावल का जन्म मुंबई में हुआ और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1984 में की। उन्होंने कई यादगार भूमिकाएँ निभाई हैं, जिनमें खलनायक और कॉमेडियन दोनों शामिल हैं। जानें उनके संघर्ष, सफलता और फिल्मी सफर के बारे में।
 
परेश रावल का 71वां जन्मदिन: जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ

परेश रावल का जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता परेश रावल आज, 30 मई को, अपने 71वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। उन्होंने अपनी अद्भुत अभिनय क्षमता के जरिए फिल्म उद्योग में एक विशेष स्थान प्राप्त किया है। चाहे वह खलनायक की भूमिका हो या हास्य अभिनेता की, वह हर किरदार में पूरी तरह से ढल जाते हैं। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियों पर नजर डालते हैं...


प्रारंभिक जीवन

परेश रावल का जन्म 30 मई 1955 को मुंबई में एक गुजराती परिवार में हुआ। उनका बचपन पार्ले ईस्ट में बीता, जहां एक ओपन थिएटर था। यहीं से उनके अंदर अभिनय के प्रति रुचि जागृत हुई। वह बचपन में काफी शरारती थे, लेकिन उनका असली जुनून थिएटर था। केवल 9 साल की उम्र में, वह बिना टिकट के नाटक देखने के लिए थिएटर में घुस जाते थे, और कई बार पकड़े भी जाते थे।


जब वह बार-बार थिएटर में घुसने की कोशिश करते थे, तो वहां के लोगों ने उनके जुनून को समझा और उन्हें नाटक देखने की अनुमति दी। धीरे-धीरे उन्हें छोटे-छोटे रोल भी मिलने लगे, जो उनके करियर की नींव बने। हालांकि, शुरुआत में उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा में नौकरी की, लेकिन वह वहां खुश नहीं थे। कुछ समय बाद, उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह से अभिनय की दुनिया में कदम रखा।


फिल्मी सफर

परेश रावल ने 1984 में फिल्म 'होली' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद, 1985 में 'अर्जुन' जैसी फिल्मों में छोटे-छोटे रोल किए। लेकिन उन्हें असली पहचान 1986 में आई फिल्म 'नाम' से मिली। 80 और 90 के दशक में, उन्होंने लगभग 100 से अधिक फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएँ निभाईं। उनकी फिल्मों में 'मोहरा', 'क्रांतिवीर', 'राम लखन', और 'दामिनी' शामिल हैं, जिनमें उनके अभिनय की सराहना की गई।


वहीं, उन्होंने न केवल खलनायक बल्कि कई गंभीर और हास्य भूमिकाएँ भी निभाईं। 2000 में आई फिल्म 'हेरा फेरी' ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। इस फिल्म में उनका किरदार 'बाबूराव गणपत आप्टे' आज भी भारतीय कॉमेडी सिनेमा का एक यादगार चेहरा है।


इसके बाद, उन्होंने 'गरम मसाला', 'भूल भुलैया', 'हंगामा', 'वेलकम', 'गोलमाल' श्रृंखला और 'ओह माय गॉड' जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया। परेश रावल ने साबित किया कि वह हर भूमिका में फिट हो सकते हैं। उन्हें दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और एक बार फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया, साथ ही 2014 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से भी नवाजा गया।


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