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क्या एक नई डॉक्यूमेंट्री वेब सीरीज युवा दर्शकों पर डाल रही है नकारात्मक प्रभाव? एनएचआरसी ने लिया संज्ञान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित डॉक्यूमेंट्री वेब सीरीज के खिलाफ शिकायत का संज्ञान लिया है। इसमें अवैध सट्टेबाजी और वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपी व्यक्ति का महिमामंडन किया गया है, जो युवा दर्शकों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। क्या यह डॉक्यूमेंट्री वास्तव में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है? जानें पूरी कहानी में।
 
क्या एक नई डॉक्यूमेंट्री वेब सीरीज युवा दर्शकों पर डाल रही है नकारात्मक प्रभाव? एनएचआरसी ने लिया संज्ञान

एनएचआरसी की कार्रवाई पर ध्यान


नई दिल्ली, 29 मई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक शिकायत पर ध्यान दिया है, जिसमें कहा गया है कि एक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित डॉक्यूमेंट्री वेब सीरीज अवैध सट्टेबाजी, वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का महिमामंडन करती है। यह युवा दर्शकों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।


मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत कार्रवाई करते हुए, प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता में आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी), मुंबई स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) के निदेशक और जबलपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को नोटिस जारी किया है। उन्हें दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।


शुक्रवार को एनएचआरसी के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में कहा गया है कि डॉक्यूमेंट्री में अवैध सट्टेबाजी और वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपी व्यक्ति को भव्य तरीके से दिखाया गया है, जिसमें महंगी कारों और धन-दौलत का प्रदर्शन शामिल है।


शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि इस तरह के चित्रण से युवा गुमराह हो सकते हैं, जिससे सट्टेबाजी की संस्कृति को बढ़ावा मिल सकता है, और इसके परिणामस्वरूप सामाजिक नुकसान, लत, वित्तीय हानि, और मानसिक पीड़ा हो सकती है।


शिकायत में आयोग से ओटीटी प्लेटफॉर्म और निर्माताओं से सामग्री की प्रकृति और उसके प्रभाव के बारे में स्पष्टीकरण मांगने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही, यह जांचने का अनुरोध किया गया है कि क्या इस तरह के चित्रण युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सार्वजनिक नैतिकता को प्रभावित कर सकते हैं।


शिकायतकर्ता ने यह भी सुझाव दिया कि अवैध सट्टेबाजी और वित्तीय अपराधों के महिमामंडन को रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देशों की सिफारिश की जाए।


आयोग ने पाया कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन के प्रतीत होते हैं। अपने आदेश में, आयोग ने संबंधित अधिकारियों को आरोपों की जांच करने और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।


इसमें जबलपुर एसपी को विशेष रूप से आवश्यक और कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है, ताकि यह जांचा जा सके कि आरोपी कैसे टेलीविजन या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दिखाई दिया।


संबंधित अधिकारियों से एटीआर प्राप्त होने के बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा।


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