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सीबीएफसी की नई गाइडलाइन: अधूरी फिल्मों को नहीं मिलेगा सर्टिफिकेशन!

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने निर्माताओं के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें अधूरी फिल्मों को सर्टिफिकेशन नहीं देने का निर्णय लिया गया है। इस नई नीति के तहत, सभी तकनीकी कार्य जैसे ग्राफिक्स और बैकग्राउंड म्यूजिक को पूरा करना अनिवार्य होगा। यदि फिल्म अधूरी है, तो उसे खारिज किया जा सकता है। इसके अलावा, आवेदन की सही जानकारी और सामग्री की आवश्यकता होगी। जानें इस नई गाइडलाइन के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
 

सीबीएफसी की सख्त नई नीति



मुंबई, 03 नवंबर (वेब वार्ता)। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने निर्माताओं के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि अधूरी फिल्मों को अब सर्टिफिकेशन नहीं दिया जाएगा।


सीबीएफसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राजेंद्र सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, किसी भी फिल्म को प्रमाणन के लिए भेजने से पहले उसके सभी तकनीकी कार्य पूरे होने चाहिए। इसमें ग्राफिक्स, बैकग्राउंड म्यूजिक, गाने और अन्य आवश्यक तकनीकी तत्व शामिल हैं। यदि कोई फिल्म अधूरी या कच्चे ग्राफिक्स के साथ प्रस्तुत की जाती है, तो उसे खारिज किया जा सकता है या प्रक्रिया में देरी हो सकती है।


बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवेदन तभी स्वीकार किया जाएगा जब सभी आवश्यक सामग्री और जानकारी सही हो। जिस दिन आवेदन स्वीकार किया जाएगा, वही उसकी आधिकारिक प्राप्ति की तारीख मानी जाएगी। फिल्म के नाम को लेकर भी बोर्ड ने अपना रुख स्पष्ट किया है। प्रचार सामग्री या आवेदन में दर्ज नाम को अंतिम नहीं माना जाएगा, और स्क्रीनिंग तथा रिवाइजिंग कमिटी को फिल्म के नाम की समीक्षा करने का अधिकार होगा।


सीबीएफसी ने निर्माताओं को सलाह दी है कि वे फिल्म की निर्धारित रिलीज तारीख से पहले प्रमाणन के लिए आवेदन करें। बोर्ड ने कहा है कि निर्माताओं द्वारा पहले घोषित रिलीज तारीख का प्रमाणन प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यदि अंतिम समय पर आवेदन करने या आवश्यक बदलावों के कारण फिल्म की रिलीज में देरी होती है, तो इसके लिए निर्माता स्वयं जिम्मेदार होंगे। इसका मतलब है कि रिलीज की तारीख घोषित करने से सेंसर बोर्ड पर जल्द प्रमाणपत्र देने का दबाव नहीं बनाया जा सकेगा।


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