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श्रुति देशपांडे ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ थिएटर में सीखी 'प्रेजेंस ऑफ माइंड'

अभिनेत्री श्रुति देशपांडे ने नाटक 'नकाब' में नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ काम करते हुए महत्वपूर्ण अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे लाइव परफॉर्मेंस के दौरान समस्याओं का सामना करना और त्वरित निर्णय लेना आवश्यक होता है। श्रुति ने नवाजुद्दीन के साथ अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि थिएटर में काम करने का तरीका फिल्मों से कितना अलग है। इसके अलावा, उन्होंने नवाजुद्दीन की बेटी शोरा के साथ अपने रिश्ते और उसके अभिनय कौशल पर भी चर्चा की।
 

नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ अनुभव साझा करतीं श्रुति देशपांडे

मुंबई, 30 अगस्त। अभिनेत्री श्रुति देशपांडे ने नाटक 'नकाब' में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और उनकी बेटी शोरा सिद्दीकी के साथ काम करने के दौरान जो अनुभव प्राप्त किया, उसे उन्होंने साझा किया। श्रुति ने बताया कि नवाजुद्दीन के साथ काम करते हुए उन्होंने 'प्रेजेंस ऑफ माइंड' यानी मौके पर त्वरित निर्णय लेने और संतुलित रहने की कला सीखी।

एक विशेष बातचीत में श्रुति ने कहा, ''नवाजुद्दीन के साथ काम करते हुए मुझे सबसे महत्वपूर्ण सीख 'प्रेजेंस ऑफ माइंड' की मिली। थिएटर में हर चीज हमेशा योजना के अनुसार नहीं चलती। स्टेज पर किसी भी समय कोई समस्या उत्पन्न हो सकती है और कलाकार को बिना घबराए उसका समाधान निकालना पड़ता है।''

शिकागो में हुए एक शो का जिक्र करते हुए श्रुति ने कहा, ''उस दिन थिएटर में लगभग एक हजार दर्शक थे। परफॉर्मेंस के दौरान अचानक नवाजुद्दीन का माइक्रोफोन खराब हो गया। दर्शकों को उनकी आवाज नहीं सुनाई दे रही थी, जिससे वे शोर करने लगे। लाइव स्टेज पर ऐसी स्थिति कलाकार के लिए चुनौतीपूर्ण होती है। उस समय नवाजुद्दीन को अपनी आवाज को और ऊंचा करना पड़ा। लेकिन किसी भी अभिनेता की आवाज को एक सीमा तक ही बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में अन्य कलाकारों ने भी उनकी मदद के लिए अपनी आवाज का वॉल्यूम बढ़ाया।''

श्रुति ने आगे कहा, ''चूंकि यह नवाजुद्दीन का पहला थिएटर अनुभव था और मैं कई वर्षों से थिएटर कर रही थी, इसलिए मुझे पता था कि उस समय मुझे जिम्मेदारी लेनी होगी। मैंने कुछ हद तक इम्प्रोवाइज किया और हमने तकनीकी समस्या का समाधान किया। इसके बाद हमने फिर से परफॉर्मेंस शुरू की।''

उन्होंने कहा, ''थिएटर और फिल्मों में काम करने के तरीके में यही सबसे बड़ा अंतर है। स्क्रीन पर यदि कोई सीन सही नहीं होता, तो उसे दोबारा शूट किया जा सकता है, लेकिन स्टेज पर ऐसा कोई विकल्प नहीं होता। वहां कलाकार को दर्शकों के सामने हर स्थिति का सामना करना पड़ता है और उसी समय उसका समाधान निकालना होता है।''

नाटक के दौरान श्रुति की नवाजुद्दीन की बेटी शोरा के साथ भी अच्छी दोस्ती हो गई। उन्होंने कहा, ''धीरे-धीरे शोरा मेरे लिए छोटी बहन जैसी बन गईं। मैंने शोरा के विकास को करीब से देखा। वह दुबई में पली-बढ़ी हैं और शुरुआत में हिंदी को ठीक से समझने और बोलने पर काम कर रही थीं। बाद में उन्होंने स्टेज पर पूरा मोनोलॉग भी किया।''

श्रुति ने शोरा में नवाजुद्दीन की झलक को लेकर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने शोरा को 'यूनिक एक्टर' बताते हुए कहा, ''जिस तरह नवाजुद्दीन अपने हर किरदार में कुछ नया और अलग लेकर आते हैं, वैसी ही क्षमता मुझे शोरा में भी दिखाई देती है।''


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