राम गोपाल वर्मा ने जन नायकन पर सेंसरशिप को बताया आउटडेटेड
राम गोपाल वर्मा का सेंसर बोर्ड पर गुस्सा
राम गोपाल वर्मा पर जन नायकन विवाद: तमिल सिनेमा के मशहूर अभिनेता विजय थलापति इन दिनों अपनी नई फिल्म 'जन नायकन' के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के साथ चल रहे विवाद के कारण चर्चा में हैं। हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में CBFC को 'जन नायकन' को U/A सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया है। इस बीच, बॉलीवुड के जाने-माने फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की है।
ऑडियंस की बेइज्जती का मामला
राम गोपाल वर्मा ने इस विवाद पर अपनी बेबाक राय रखते हुए सेंसर बोर्ड को पुराना और अप्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में लोग अपनी पसंद की सामग्री देख सकते हैं, और सेंसरशिप केवल दर्शकों की बेइज्जती करती है।
सेंसर बोर्ड की प्रासंगिकता पर सवाल
वर्मा ने अपने X हैंडल पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा, 'CBFC का उद्देश्य अब समाप्त हो चुका है, लेकिन इसे बनाए रखने की बहस में सुस्ती के कारण इसे जीवित रखा गया है। फिल्म इंडस्ट्री इसके लिए सबसे अधिक जिम्मेदार है। यह बेवकूफी है कि आज भी सेंसर बोर्ड की आवश्यकता है।'
CENSOR BOARD is OUTDATED
— Ram Gopal Varma (@RGVzoomin) January 9, 2026
Not in the context of just @Actor_Vijay ‘s #JanaNayagan ‘s censor issues but in an overall manner, it is truly foolish to think that the censor board is still relevant today
It has long outlived it’s purpose, but it’s being kept alive out of laziness…
सेंसरशिप का दिखावा
उन्होंने आगे कहा, 'किसी फिल्म से एक शब्द हटाना या किसी दृश्य को काटना यह सोचकर कि इससे समाज की रक्षा होगी, एक बड़ा मजाक है। सेंसर बोर्ड तब बना था जब फिल्में सीमित थीं और लोगों की पहुंच भी कम थी। आज के डिजिटल युग में, बच्चे अपने फोन पर किसी भी प्रकार की सामग्री देख सकते हैं। इस समय में सेंसरशिप केवल दर्शकों को सच्चाई से दूर रख रही है।'
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