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राजस्थान में वन्यजीवों की गणना: 24 घंटे का विशेष अभियान शुरू!

राजस्थान के करौली जिले में वन विभाग एक विशेष 24 घंटे का वन्यजीव गणना अभियान आयोजित कर रहा है, जो 1 से 2 मई तक चलेगा। इस अभियान में जल स्रोतों पर वन्यजीवों की गतिविधियों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। वाटर हॉल पद्धति का उपयोग करते हुए, यह गणना वन्यजीवों की संख्या और प्रजातियों का सही आकलन करने में मदद करेगी। जानें इस महत्वपूर्ण अभियान के बारे में और कैसे यह वन्यजीव संरक्षण में योगदान देगा।
 
राजस्थान में वन्यजीवों की गणना: 24 घंटे का विशेष अभियान शुरू!

वन्यजीव गणना अभियान का आयोजन


राजस्थान के करौली जिले में वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर वन विभाग द्वारा एक विशेष 24 घंटे का वन्यजीव गणना अभियान आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम 1 मई से 2 मई तक चलेगा, जिसमें जिले भर में वन्यजीवों की गतिविधियों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इस बार, गणना की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए समय को संशोधित किया गया है। अब यह अभियान शाम 5 बजे से शुरू होकर अगले दिन शाम 5 बजे तक चलेगा, जिससे 24 घंटे की निरंतर निगरानी संभव होगी।



इस गणना को वाटर हॉल पद्धति (जल स्रोत आधारित गणना) के माध्यम से किया जाएगा। इस तकनीक में वन्यजीवों के जल स्रोतों पर आने-जाने की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखा जाता है, जिससे उनकी संख्या और प्रजातियों का सही आकलन किया जा सके। करौली जिले की सभी 6 वन रेंजों में यह अभियान चलाया जाएगा, जिसमें कुल 27 से अधिक वाटर प्वाइंटों को चिन्हित किया गया है, जहां वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी तैनात रहेंगे।


गणना को दो पारियों में विभाजित किया गया है—पहली पारी शाम 5 बजे से सुबह 5 बजे तक और दूसरी पारी सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। इस दौरान वन्यजीवों के जल स्रोतों पर पहुंचने के समय, उनकी संख्या और प्रजातियों का बारीकी से रिकॉर्ड रखा जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस गणना से जिले में वन्यजीवों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में मदद मिलेगी, जिससे संरक्षण योजनाओं को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।


विशेषज्ञों के अनुसार, वाटर हॉल पद्धति वन्यजीव गणना की एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय तकनीक मानी जाती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां वन्यजीव जल स्रोतों पर नियमित रूप से आते हैं। कुल मिलाकर, करौली में शुरू होने वाला यह 24 घंटे का अभियान वन्यजीव संरक्षण और उनकी संख्या के वैज्ञानिक आकलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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