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मलाइका अरोड़ा ने साझा किए प्राणायाम के फायदें, जानें कैसे बदल सकते हैं आपकी सेहत!

बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने प्राणायाम के पांच महत्वपूर्ण प्रकारों का अभ्यास करते हुए उनके फायदों के बारे में बताया। भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम विलोम, भ्रामरी और उद्गीथ जैसे प्राणायामों के माध्यम से वह अपने फैंस को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। जानें इन प्राणायामों के लाभ और सावधानियाँ।
 
मलाइका अरोड़ा ने साझा किए प्राणायाम के फायदें, जानें कैसे बदल सकते हैं आपकी सेहत!

मलाइका अरोड़ा का प्राणायाम वीडियो




मुंबई, 5 जनवरी। बॉलीवुड की फिटनेस आइकन मलाइका अरोड़ा हमेशा से अपनी सेहत के प्रति जागरूक रही हैं। वह नियमित रूप से अपने फैंस के साथ हेल्दी लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज और योग से जुड़ी जानकारियाँ साझा करती हैं। हाल ही में, उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह विभिन्न प्राणायाम करते हुए दिखाई दे रही हैं।


इस वीडियो में, मलाइका ने उन प्राणायामों का उल्लेख किया जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। उन्होंने अपने कैप्शन में पांच महत्वपूर्ण प्राणायामों के नाम साझा किए।


मलाइका ने जिन प्राणायामों का उल्लेख किया, उनमें भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम विलोम, भ्रामरी और उद्गीथ शामिल हैं। वीडियो में वह इन प्राणायामों का अभ्यास करते हुए उनके फायदों के बारे में भी बता रही हैं।


भस्त्रिका प्राणायाम: यह प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है, शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाता है और मानसिक तनाव को कम करता है। हालांकि, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या सांस की समस्याओं से ग्रसित लोगों को इसे बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।


कपालभाति: इस प्राणायाम में तेज़ी से सांस बाहर निकाली जाती है, जिससे शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। यह पाचन में सुधार करता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। लेकिन गर्भवती महिलाओं या पेट की समस्याओं वाले लोगों को इसे नहीं करना चाहिए।


अनुलोम विलोम: इस प्राणायाम में नाक से धीरे-धीरे सांस ली और छोड़ी जाती है। यह मानसिक शांति और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। लेकिन सांस की समस्याओं वाले लोगों को इसे प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।


भ्रामरी: इस प्राणायाम में सांस छोड़ते समय भौंरे की आवाज निकलती है, जो मानसिक तनाव और सिरदर्द को कम करती है। लेकिन कान की समस्याओं या अत्यधिक शोर में इसे नहीं करना चाहिए।


उद्गीथ: इसमें गहरी सांस लेकर धीरे-धीरे आवाज के साथ छोड़ी जाती है। यह फेफड़ों को मजबूत करता है और मानसिक तनाव को कम करता है। लेकिन सांस लेने में कठिनाई या गले की समस्याओं वाले लोगों को इसे नहीं करना चाहिए।


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