भारतीय संगीत की वैश्विक पहचान: जिगर सरैया का अनोखा दृष्टिकोण
भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर लाने की आवश्यकता
मुंबई, 7 जून। वर्तमान समय में भारतीय संगीत के संदर्भ में एक नई चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग मानते हैं कि वैश्विक संगीत का प्रभाव भारतीय संगीत की मौलिकता को प्रभावित कर रहा है, जबकि अन्य इसे नए अवसरों के रूप में देख रहे हैं। इस विषय पर प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी सचिन-जिगर के जिगर सरैया ने अपने विचार साझा किए।
जिगर सरैया ने एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह भारतीय कलाकारों और श्रोताओं की जिम्मेदारी है कि वे अपने संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करें और उसकी शक्ति को दुनिया के सामने लाएं।
अपनी नई फिल्म 'चांद मेरा दिल' के प्रचार के दौरान, जिगर ने कहा, "वैश्विक संगीत से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि दुनिया में कोई नया संगीत प्रचलित है, तो भारतीय कलाकारों को यह सोचना चाहिए कि वे अपने संगीत को भी उसी तरह से कैसे प्रस्तुत कर सकते हैं। असली चुनौती यह नहीं है कि अन्य देशों का संगीत लोकप्रिय हो रहा है, बल्कि यह है कि भारतीय संगीत को और अधिक लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए।"
जिगर ने आगे कहा, "भारतीय संगीत की सबसे बड़ी ताकत इसकी विविधता है। भारत का संगीत किसी भी शैली के साथ आसानी से जुड़ सकता है और फिर भी अपनी पहचान बनाए रख सकता है। भारतीय धुनों, सुरों और आवाजों में एक विशेष आकर्षण है, जो विश्वभर के कलाकारों को प्रभावित करता है। इसलिए, भारतीय कलाकारों को अपने संगीत की शक्ति पर विश्वास करना चाहिए और उसे बड़े मंचों तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए।"
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "हाल ही में एक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कलाकार ने अपनी नई रचना में महान गायिका आशा भोसले की आवाज का एक अंश शामिल किया। यह पहली बार नहीं है जब भारतीय संगीत या कलाकारों की आवाज को वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। ऐसे कई उदाहरण हैं जो यह दर्शाते हैं कि भारतीय संगीत की पहुंच लगातार बढ़ रही है।"
जिगर ने कहा, "जब भी वे विदेशी कलाकारों या संगीत निर्माताओं से मिलते हैं, तो वे भारतीय संगीत को एक स्थानीय शैली के रूप में नहीं, बल्कि एक वैश्विक संगीत के रूप में देखते हैं। भारतीय संगीत की सबसे बड़ी पहचान इसकी विशिष्टता है। दुनिया के लोग भारतीय संगीत को इसकी अनोखी धुनों, लय और भावनात्मक गहराई के कारण पसंद करते हैं। जिस तरह भारतीय श्रोता विदेशी कलाकारों का सम्मान करते हैं, उसी तरह उन्हें अपने संगीत और कलाकारों पर गर्व करना चाहिए।"
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