प्रेम धवन: भारतीय सिनेमा के अनमोल रत्न की कहानी
प्रेम धवन का जीवन और योगदान
मुंबई, 12 जून। भारतीय फिल्म उद्योग में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी कला समय के साथ भी जीवित रहती है। प्रेम धवन ऐसे ही एक बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने संगीत, देशभक्ति गीतों और कोरियोग्राफी में अपनी छाप छोड़ी। वे न केवल एक गीतकार थे, बल्कि एक कुशल संगीतकार और कोरियोग्राफर भी थे, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी।
प्रेम धवन का जन्म 13 जून 1923 को अंबाला में हुआ। उनके परिवार का संबंध कला और संस्कृति से था, और उनके पिता एक जेल सुपरिटेंडेंट थे। इस कारण से, उनका परिवार कई शहरों में रहा, और अंततः लाहौर में बस गया, जहां उन्होंने अपनी शिक्षा प्राप्त की। लाहौर कॉलेज में उनके सहपाठी इंद्र कुमार गुजराल और साहिर लुधियानवी जैसे महान लोग थे।
युवावस्था में, प्रेम धवन स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े और इप्टा (इंडियन पीपल्स थिएटर एसोशिएसन) का हिस्सा बने। यहां उन्होंने नाटक, गीत और नृत्य के माध्यम से आजादी का संदेश फैलाया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत और नृत्य की शिक्षा भी ली, जिससे उनकी कला में निखार आया।
मुंबई आने के बाद, उन्होंने फिल्म उद्योग में कदम रखा। प्रारंभ में, वे संगीतकारों के सहायक के रूप में काम करते थे, लेकिन 1946 में उन्होंने गीतकार के रूप में पहचान बनाई। फिल्म 'जिद्दी' और अन्य फिल्मों में उनके गीतों को बहुत सराहा गया। उन्होंने सलील चौधरी, अनिल विश्वास, रवि और चित्रगुप्त जैसे बड़े संगीतकारों के साथ काम किया।
प्रेम धवन को उनके देशभक्ति गीतों के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। फिल्म 'शहीद' में उनका लिखा 'मेरा रंग दे बसंती चोला' आज भी लोगों में जोश भर देता है। उनकी रचनात्मकता केवल गीत लेखन तक सीमित नहीं थी; उन्होंने कई फिल्मों में कोरियोग्राफी भी की। फिल्म 'नया दौर' में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
उनके जीवन से जुड़ी एक दिलचस्प घटना यह है कि एक बार अभिनेत्री सुरैया फिल्म 'मोती महल' की शूटिंग के लिए देर से पहुंचीं क्योंकि उनकी कार खराब हो गई थी। प्रेम धवन ने इस अनुभव को एक गीत में बदल दिया, 'कभी ना बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में...' जो बाद में बेहद लोकप्रिय हुआ।
प्रेम धवन ने न केवल फिल्मी गीतों में, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री और देशभक्ति फिल्मों में भी काम किया। उन्हें 1970 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 7 मई 2001 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा।
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