पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन: छत्तीसगढ़ ने खोया एक अनमोल रत्न
पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन
दुर्ग, 5 जुलाई। प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का निधन रायपुर स्थित एम्स में हुआ। उन्होंने 70 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को दुर्ग में उनके निवास स्थान पर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया, जहां बड़ी संख्या में प्रशंसक और आम नागरिक उन्हें विदाई देने पहुंचे। कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी कला को याद करते हुए भावुक हो गए।
भिलाई-चरोदा के महापौर निर्मल कोसरे ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "यह हमारे देश और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है कि तीजन बाई को भारत सरकार द्वारा पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे तीन सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिले। उनके जैसे अद्वितीय कलाकार सदियों में एक बार ही जन्म लेते हैं। एक छोटे से गांव में पली-बढ़ीं तीजन बाई ने अपनी लोक कला के माध्यम से न केवल अपना बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया। उन्होंने 26 देशों में पंडवानी कला का प्रदर्शन कर भारतीय लोक संस्कृति का परचम लहराया।"
महापौर ने आगे कहा, "तीजन बाई की गूंजती आवाज, उनकी अनोखी कला और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।"
रायपुर एम्स में लंबे समय से बीमार चल रहीं तीजन बाई ने शनिवार रात को अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर दुर्ग लाया गया, लोग उन्हें अंतिम बार देखने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े। कई लोगों ने उनकी तस्वीरों और यादों के साथ श्रद्धांजलि दी।
तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के भिलाई क्षेत्र में हुआ था और उनका जुड़ाव बचपन से ही पंडवानी लोक कला से रहा। उन्होंने बहुत कम उम्र में मंच पर प्रस्तुति देना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी दमदार आवाज, मंच पर जीवंत अभिनय और महाभारत की कथाओं को प्रस्तुत करने का अनोखा अंदाज उन्हें अन्य कलाकारों से अलग बनाता था।
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