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तनिषा मुखर्जी ने जया बच्चन के लिए पैपराजी से की अपील, दुर्गा पूजा में शांति बनाए रखने की दी सलाह

तनिषा मुखर्जी ने हाल ही में दुर्गा पूजा के दौरान जया बच्चन को परेशान न करने की अपील की है। उन्होंने पैपराजी से अनुरोध किया कि वे जया आंटी को परेशान न करें और पूजा के दौरान शांति बनाए रखें। इस साल 'नॉर्थ बॉम्बे दुर्गा पूजा' का आयोजन भव्य तरीके से किया जा रहा है, जिसमें बॉलीवुड की कई हस्तियां शामिल होंगी। जानें इस आयोजन का महत्व और तनिषा की अपील के पीछे की कहानी।
 

दुर्गा पूजा के दौरान जया बच्चन को परेशान न करने की अपील




मुंबई, 10 अक्टूबर। हर साल की तरह इस वर्ष भी 'नॉर्थ बॉम्बे दुर्गा पूजा' का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस अवसर पर बॉलीवुड की कई हस्तियां माता रानी का आशीर्वाद लेने आती हैं। हाल ही में, काजोल की बहन और अभिनेत्री तनिषा मुखर्जी ने पैपराजी से अनुरोध किया कि वे दुर्गा पूजा के दौरान जया बच्चन को परेशान न करें।


दुर्गा पूजा के एक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत करते हुए तनिषा ने कहा, "मैं देख रही हूं कि आप लोग जया आंटी को बहुत परेशान कर रहे हैं। कुछ रिपोर्टर्स जानबूझकर उन्हें उकसाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए मेरी आप सभी से गुजारिश है कि हमारी दुर्गा पूजा में ऐसा मत कीजिए।" उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "जया आंटी को परेशान मत कीजिए, ठीक है?"


तनिषा ने भीड़ को लेकर भी लोगों से अपील की। उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान पंडाल में लाखों लोग आते हैं, इसलिए धक्का-मुक्की न करें और एक-दूसरे का ख्याल रखें।


जया बच्चन और पैपराजी के बीच की नोकझोंक अक्सर चर्चा का विषय रहती है। जया कई बार सार्वजनिक रूप से फोटो खींचने पर नाराजगी जता चुकी हैं। हालांकि, वह हर साल इस दुर्गा पूजा पंडाल में आती हैं और उनका तनिषा मुखर्जी के परिवार के साथ गहरा रिश्ता है।


मुखर्जी परिवार के लिए पूजा का विशेष महत्व है। नॉर्थ बॉम्बे सार्बोजनिन दुर्गा पूजा मुंबई की सबसे पुरानी और भव्य पूजा में से एक है, जिसकी स्थापना 1948 में काजोल और निर्देशक अयान मुखर्जी के दादा, पद्मश्री शशधर मुखर्जी और उनकी पत्नी श्रीमती सतीरानी मुखर्जी ने की थी। अयान मुखर्जी, काजोल और तनिषा के चचेरे भाई हैं।


पहली पूजा सांताक्रूज के श्री मंडल हॉल में हुई थी, और तब से यह सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से और भी बड़ी होती गई है। यह मुंबई के सबसे पुराने और भव्य दुर्गा पूजा आयोजनों में से एक है, जिसे पहले काजोल के चाचा और अयान मुखर्जी के पिता देब मुखर्जी संभालते थे। उनके निधन के बाद पूरा परिवार इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है.


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