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जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव: क्या है इस आयोजन का महत्व?

जम्मू-कश्मीर में पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का सफल आयोजन हुआ, जिसने क्षेत्र में फिल्म उद्योग के विकास की नई दिशा में कदम बढ़ाया है। डल झील पर आयोजित फ्लोटिंग सिनेमा ने दर्शकों को क्लासिक फिल्मों का अनुभव कराया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस महोत्सव को स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण कदम बताया। 30 से अधिक देशों की 120 से ज्यादा फिल्मों का प्रदर्शन किया गया, जिससे जम्मू-कश्मीर को एक रचनात्मक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक नई शुरुआत हुई है।
 

जम्मू-कश्मीर का पहला अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव

श्रीनगर, 11 सितंबर। जम्मू-कश्मीर में आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का चार दिवसीय कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस महोत्सव ने क्षेत्र में फिल्म उद्योग के विकास की नई दिशा में कदम बढ़ाया है।


इस महोत्सव के दौरान डल झील पर आयोजित विशेष फ्लोटिंग सिनेमा स्क्रीनिंग ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। यहां पर क्लासिक फिल्मों का प्रदर्शन किया गया, जिससे दर्शकों को एक अनूठा अनुभव मिला। इसके अलावा, विभिन्न देशों की फिल्मों और बॉलीवुड के नए प्रोजेक्ट्स का भी प्रदर्शन किया गया।


मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह महोत्सव केवल खूबसूरत लोकेशन को प्रदर्शित करने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य स्थानीय युवा प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करना भी था। इस आयोजन में उभरते लेखकों, फिल्म निर्माताओं और कलाकारों के लिए प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव के अवसर उपलब्ध कराए गए।


उन्होंने यह भी बताया कि इस पहल ने जम्मू-कश्मीर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म उद्योग के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है।


महोत्सव के समापन पर, मुख्यमंत्री ने इसे जम्मू-कश्मीर की स्पष्ट मंशा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य फिल्म नीति के माध्यम से देश और विदेश के फिल्म निर्माताओं का स्वागत करने के लिए तैयार है। सरकार एक ऐसा फिल्म इकोसिस्टम बनाने पर काम कर रही है, जो बाहरी निर्माताओं और स्थानीय प्रतिभाओं को समान अवसर प्रदान करे।


मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि महोत्सव के दौरान 30 से अधिक देशों की 120 से ज्यादा फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने डल झील पर प्रतिष्ठित सिनेमा को फिर से जीवंत किया है।


मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर की सोच केवल एक पारंपरिक शूटिंग लोकेशन बनने तक सीमित नहीं है। राज्य को एक रचनात्मक केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, जहां स्थानीय कहानियां जन्म लें और नई प्रतिभाएं उभरें।


उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन भविष्य में जम्मू-कश्मीर को देश के प्रमुख फिल्म और रचनात्मक केंद्रों में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


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