जगजीत सिंह: गजल सम्राट की पुण्यतिथि पर कुमार सानू की प्रेरणादायक कहानी
जगजीत सिंह की पुण्यतिथि और कुमार सानू का सफर
मुंबई, 10 अक्टूबर। आज भारत के प्रसिद्ध गायक और गजल सम्राट जगजीत सिंह की पुण्यतिथि है। उनकी आवाज की मिठास के साथ-साथ उनका व्यक्तित्व भी बेहद आकर्षक था। बहुत से लोग नहीं जानते कि उन्होंने कई मशहूर गायकों को बॉलीवुड में प्रवेश दिलाने में मदद की, जिनमें 90 के दशक के लोकप्रिय गायक कुमार सानू भी शामिल हैं।
कुमार सानू ने अपने करियर की शुरुआत मुंबई में होटलों और रेस्टोरेंट में गाकर की थी। इस कठिन दौर में उनकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।
जब कुमार सानू एक स्टूडियो में किशोर कुमार के गाने रिकॉर्ड कर रहे थे, उसी समय जगजीत सिंह पास के स्टूडियो में अपनी रिकॉर्डिंग कर रहे थे। उन्होंने सानू की आवाज सुनी और तुरंत प्रभावित हुए।
जगजीत सिंह ने सानू को अगले दिन अपने घर बुलाया, जहां सानू ने किशोर कुमार का प्रसिद्ध गाना 'मेरे सामने वाली खिड़की में' गाया। जगजीत ने उन्हें तुरंत एक नया गाना सीखने के लिए कहा।
कुमार सानू ने इस घटना का जिक्र द कपिल शर्मा शो के एक एपिसोड में किया था। उन्होंने बताया कि जगजीत सिंह ने उन्हें एक शो में गाने का मौका दिया, जिससे उनका करियर शुरू हुआ।
उन्होंने बताया, "जब मैं स्टेज पर गया, तो जगजीत सिंह ने कहा कि कोलकाता से आया एक लड़का है सानू, इसे पहला मौका दिया जा रहा है। अगर आप इसे पसंद करते हैं, तो यह सफल होगा।" जैसे ही उन्होंने गाना शुरू किया, दर्शकों ने तालियां बजाईं।
जगजीत सिंह ने उन्हें अपनी कार में बैठाकर एक प्रसिद्ध स्टूडियो में ले गए, जहां उनका गाना रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने अपनी जेब से 1,500 रुपए दिए और मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी से मिलवाया। इस तरह कुमार सानू के लिए बॉलीवुड के दरवाजे खुल गए।
जगजीत सिंह का सफर भी आसान नहीं था। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा पंडित छगनलाल शर्मा और उस्ताद जमाल खान से ली। 1961 में जालंधर में ऑल इंडिया रेडियो से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में बॉम्बे में जिंगल्स गाने लगे।
उन्होंने गजल को आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया। उनका 'बोल-प्रधान' अंदाज, जिसमें शब्दों की स्पष्टता और मधुर धुनों पर जोर होता था, लोगों के दिलों में बस गया।
पत्नी चित्रा सिंह के साथ मिलकर उन्होंने 1970 और 1980 के दशक में एक प्रसिद्ध जोड़ी बनाई। 1976 में उनका एल्बम 'द अनफॉरगेटेबल्स' एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
उन्होंने 'अर्थ' (1982), 'साथ साथ' (1982) और 'प्रेम गीत' (1981) जैसी फिल्मों के लिए संगीत दिया। उनके योगदान के लिए उन्हें 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
जगजीत सिंह को 'गजल किंग' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 10 अक्टूबर 2011 को 70 वर्ष की आयु में मुंबई में अंतिम सांस ली।
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