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क्या ‘जना नायकन’ की रिलीज पर संकट? मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई जारी!

अभिनेता विजय की नई फिल्म ‘जना नायकन’ को सेंसर सर्टिफिकेट मिलने में अचानक बाधा आ गई है। मद्रास हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के कारण फिल्म की 9 जनवरी को होने वाली रिलीज पर संकट मंडरा रहा है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेजा है, जिससे फिल्म की रिलीज पर अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और फिल्म का भविष्य क्या होगा!
 
क्या ‘जना नायकन’ की रिलीज पर संकट? मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई जारी!

फिल्म ‘जना नायकन’ की सेंसर प्रक्रिया में अड़चन


चेन्नई, 7 जनवरी। अभिनेता विजय की नई तमिल फिल्म ‘जना नायकन’ को सेंसर सर्टिफिकेट मिलने में अचानक बाधा आ गई है। फिल्म की रिलीज 9 जनवरी को निर्धारित थी, लेकिन इस मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।


केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने फिल्म का सेंसर सर्टिफिकेट रोक दिया है और इसे एक नई रिव्यू कमेटी के पास दोबारा जांच के लिए भेजा गया है। पहले, क्षेत्रीय सेंसर समिति ने कुछ दृश्यों को हटाने और कुछ संवादों को म्यूट करने के बाद फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की थी।


अब रिव्यू कमेटी के पास भेजे जाने से फिल्म की रिलीज पर अनिश्चितता छा गई है।


फिल्म का निर्देशन एच. विनोथ ने किया है और इसे केवीएन प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित किया गया है। इसमें विजय के साथ पूजा हेगड़े और ममिता बैजू भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म लगभग 500 करोड़ रुपये के बजट में बनी है और इसे 22 देशों में चार भाषाओं में 5,000 से अधिक सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है।


इस फिल्म को लेकर चर्चा इसलिए भी है क्योंकि इसे विजय की राजनीति में कदम रखने से पहले की अंतिम बड़ी फिल्म माना जा रहा है।


कोर्ट में फिल्म निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ वकील सतीश परासरन और विजयन सुब्रमणियन ने बताया कि सेंसर सर्टिफिकेट के लिए आवेदन 18 दिसंबर को किया गया था।


फिल्म देखने के बाद 22 दिसंबर को क्षेत्रीय सेंसर बोर्ड ने कुछ दृश्यों को हटाने और कुछ संवादों को म्यूट करने के निर्देश दिए और यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की।


निर्माताओं ने सभी निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक बदलाव किए, लेकिन जब सर्टिफिकेट मिलने का समय आया, तो केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की चेयरपर्सन ने ईमेल के माध्यम से बताया कि कुछ दृश्यों और संवादों के संबंध में शिकायतें मिली हैं, इसलिए फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेजा गया है।


निर्माताओं ने इस निर्णय को कोर्ट में चुनौती दी, यह कहते हुए कि फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है और न ही इसे सार्वजनिक रूप से दिखाया गया है, इसलिए किसी तीसरे पक्ष की शिकायत का कोई आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जब सेंसर बोर्ड पहले ही यू/ए सर्टिफिकेट की सिफारिश कर चुका था, तो चेयरपर्सन को अकेले यह निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।


निर्माताओं के वकील ने तर्क दिया कि रिलीज से ठीक पहले सर्टिफिकेट रोकना अनुचित है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा। उन्होंने कोर्ट से तुरंत सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश देने की मांग की।


केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरासन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सभी फिल्में कानून के सामने समान हैं, चाहे उनका बजट कितना भी बड़ा हो। उन्होंने बताया कि कुछ दृश्यों के धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की शिकायतें मिली हैं।


सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से सवाल किया कि जब फिल्म को पहले ही यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की गई थी, तो अचानक इसे रिव्यू के लिए क्यों भेजा गया।


सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, मद्रास हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और कहा है कि ‘जना नायकन’ को सेंसर सर्टिफिकेट देने का निर्णय 9 जनवरी को सुनाया जाएगा, जो कि फिल्म की रिलीज का दिन है।


इस कारण, फिल्म की थिएटर रिलीज फिलहाल अनिश्चितता में है।


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