क्या है 'सहिया' फिल्म का विवाद? कपिल सिब्बल ने उठाए गंभीर सवाल
फिल्म 'सहिया' पर सेंसर बोर्ड का विवाद
नई दिल्ली, 14 सितंबर। फिल्म 'सहिया' को लेकर सेंसर बोर्ड के निर्णय ने एक नया मोड़ ले लिया है। वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने फिल्म देखने के बाद इसकी सराहना की है। उन्होंने कहा कि फिल्म में ऐसा कोई दृश्य नहीं है, जिसे आपत्तिजनक मानकर रिलीज को रोका जाए। सिब्बल ने इसे इतना उत्कृष्ट बताया कि इसे रोकने के बजाय पुरस्कार मिलना चाहिए।
कपिल सिब्बल ने कहा, ''मैं यह जानकर चकित हूं कि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को प्रमाणपत्र देने से क्यों मना किया। अब हम इस मामले को अदालत में ले जाएंगे और फिल्म की रिलीज के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। क्या इसका कारण '4 पीएम' नाम से जुड़ा है?''
उन्होंने आगे कहा, ''सरकार की दिशा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है। देश का माहौल बदल रहा है, लेकिन सरकार को शायद इसका एहसास नहीं है।''
सिब्बल ने स्पष्ट किया, ''मैंने फिल्म देखी है, इसका उद्देश्य हिंसा को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि आम इंसान और उसके प्रेम की कहानी को उजागर करना है। यदि फिल्म में कोई आपत्तिजनक हिस्सा है, तो उसे स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। यह फिल्म इतनी बेहतरीन है कि सरकार को इसे रोकने के बजाय सम्मानित करना चाहिए।''
फिल्म 'सहिया' को लेकर सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया पर निर्माता पक्ष ने भी सवाल उठाए हैं। निर्माता के अनुसार, 23 अगस्त को अंतिम प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया गया था, और तय प्रक्रिया के अनुसार, इस पर पांच दिन के भीतर निर्णय होना चाहिए था। लेकिन 14 सितंबर तक इस मामले में लगभग 22 दिन बीत चुके हैं, और सेंसर बोर्ड ने स्पष्ट नहीं किया कि फिल्म को दोबारा देखा गया या नहीं।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी ने 27 अगस्त 2026 को फिल्म को प्रमाणपत्र देने से मना कर दिया। फिल्म के निर्माता संजय शर्मा ने बताया कि सीबीएफसी ने फिल्म पर नक्सलवाद से जुड़े होने का आरोप लगाकर इसे पास करने में रुकावट डाली।
संजय शर्मा ने एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि अधिकारी ने कहा कि यदि फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश में हुई होती, तो वह इसे सर्टिफिकेट दे देते। उन्होंने कहा, ''यह सुनकर मैं चकित रह गया। कहानी वही है, लेकिन शूटिंग स्थान बदलने से फिल्म का अर्थ कैसे बदल सकता है?''
उन्होंने चिंता जताई कि कहीं इस सोच के कारण आदिवासी क्षेत्रों में फिल्म की शूटिंग पर रोक न लग जाए।
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