क्या है माधुरी दीक्षित की नई फिल्म 'मां बहन' का गहरा संदेश?
मनोरंजन और समाज का गहरा संबंध
मुंबई, 14 जून (वेब वार्ता)। अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने अपनी नई फिल्म 'मां बहन' के संदर्भ में मनोरंजन और समाज के बीच के संबंध पर अपने विचार साझा किए।
उनका मानना है कि समाज की महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का सबसे अच्छा तरीका मनोरंजन है।
माधुरी ने कहा कि जब लोग किसी फिल्म या शो का आनंद लेने बैठते हैं, तो उनका मुख्य उद्देश्य कुछ समय के लिए अपने दैनिक तनाव से दूर रहना और आनंद लेना होता है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि कहानी के माध्यम से समाज की सच्चाइयों को सहज और मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत किया जाए, तो उसका प्रभाव अधिक गहरा और स्थायी होता है।
माधुरी का मानना है कि लोग हंसते-हंसते या मनोरंजन करते हुए भी आसानी से समझ सकते हैं कि उनके चारों ओर क्या हो रहा है, समाज में क्या सही है और क्या गलत है, और किन बदलावों की आवश्यकता है।
उनके अनुसार, मनोरंजन के साथ दिया गया संदेश लोगों के दिलों और दिमागों तक आसानी से पहुंचता है और उन्हें सोचने पर मजबूर करता है।
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि जब किसी बात को बार-बार समझाया जाता है, तो लोग उससे दूर हो जाते हैं, लेकिन जब वही बात मजेदार और दिलचस्प तरीके से प्रस्तुत की जाती है, तो लोग उसे ध्यान से सुनते हैं और उस पर चर्चा करते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्मों और कहानियों की यही ताकत है कि वे गंभीर मुद्दों को भी सुलभ और आकर्षक बना सकती हैं।
माधुरी ने बताया कि उन्हें ऐसी कहानियां पसंद हैं, जिनमें मनोरंजन के साथ-साथ गहरा और सकारात्मक सामाजिक संदेश भी हो, जो दर्शकों को जागरूक कर सके।
इसके अलावा, उन्होंने समाज में महिलाओं और पुरुषों के प्रति भिन्न दृष्टिकोण पर भी चर्चा की और पितृसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाए।
माधुरी ने कहा कि यह एक पितृसत्तात्मक समाज है, जो प्यार और रिश्तों में आज भी दोहरे मापदंड अपनाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई पुरुष कई गर्लफ्रेंड रखता है, तो उसे रोमियो कहा जाता है, जबकि महिलाओं को नकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाता है।
अभिनेत्री ने बताया कि उनकी फिल्म 'मां बहन' इन पुरानी परंपराओं और लैंगिक असमानता को चुनौती देती है।
फिल्म में महिलाओं को मजबूत और स्वतंत्र किरदार दिया गया है, जो अपने अधिकारों के लिए खड़ी होती हैं। माधुरी ने कहा कि हर महिला को सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है, और समाज को इस सोच को अपनाना चाहिए।
फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है, और इसमें माधुरी के साथ तृप्ति डिमरी, धारणा दुर्गा, रवि किशन, गीतांजलि कुलकर्णी, अरुणोदय सिंह और शार्दुल भारद्वाज भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।
माधुरी दीक्षित आज भी अपनी अदाकारी, मुस्कान और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जानी जाती हैं। वह दशकों से दर्शकों का मनोरंजन कर रही हैं और हर दौर में नए और चुनौतीपूर्ण किरदारों के साथ खुद को साबित कर रही हैं।
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