क्या है 'बाला गोरिया' फिल्म की कहानी? जानें उत्तराखंड के गोलू देवता की अनकही दास्तान!
गोलू देवता की कहानी अब बड़े पर्दे पर
मुंबई, 13 अक्टूबर। धार्मिक विश्वास और भारतीय लोककथाओं पर आधारित फिल्मों की बढ़ती चर्चा के बीच, उत्तराखंड के गोलू देवता की कहानी अब सिनेमा में आने वाली है। इस फिल्म का नाम 'बाला गोरिया' है, जो कुमाऊं क्षेत्र में न्याय के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। गोलू देवता की लोककथा पर आधारित यह फिल्म ऐसे समय में आ रही है, जब नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता प्राप्त की है।
ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, 'हनुमान अंश' का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 435 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। हालांकि, इसकी शुरुआत उम्मीद के अनुसार नहीं रही, लेकिन बाद में दर्शकों से इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला। अब 'बाला गोरिया' के निर्माता भी इसी तरह की सफलता की उम्मीद कर रहे हैं।
'हनुमान अंश' में नीम करोली बाबा की कहानी को दर्शाया गया है, जिनके बारे में देश और विदेश में कई लोग जानते हैं। इसके विपरीत, गोलू देवता की पहचान मुख्य रूप से उत्तराखंड और कुमाऊं क्षेत्र में है। इसलिए, 'बाला गोरिया' के निर्माताओं को अपनी कहानी को अन्य राज्यों के दर्शकों तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रमोशन की आवश्यकता होगी।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह फिल्म पहले 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी, लेकिन 'हनुमान अंश' की कमाई को देखते हुए इसे टाल दिया गया है। अब यह फिल्म नवंबर में रिलीज होने की संभावना है।
'बाला गोरिया' की कहानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के लोकदेवता गोलू देवता से संबंधित है। उन्हें गोल्ज्यू महाराज और न्याय के देवता के नाम से भी जाना जाता है। अल्मोड़ा के चितई, चंपावत और घोड़ाखाल में उनके प्रसिद्ध मंदिर हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, लोग गोलू देवता के दरबार में अपनी समस्याएं और शिकायतें चिट्ठियों में लिखकर अर्पित करते हैं। जब उनकी मनोकामना पूरी होती है, तो श्रद्धालु मंदिर में घंटियां चढ़ाकर आभार व्यक्त करते हैं।
लोककथा के अनुसार, गोलू देवता का जन्म एक राजपरिवार में हुआ था। कहा जाता है कि परिवार के भीतर हुई साजिशों के बावजूद वह जीवित बचे और आगे चलकर न्यायप्रियता के लिए जाने गए। इसी कारण उनकी छवि एक ऐसे देवता के रूप में बनी, जिनसे अन्याय के खिलाफ न्याय की गुहार लगाई जाती है।
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