क्या है फिल्म 'गोधरा' की कहानी? जानें निर्देशक और निर्माता की जुबानी
दिल्ली शब्दोत्सव में फिल्म निर्माताओं की चर्चा
नई दिल्ली, 4 जनवरी। हिंदी सिनेमा में विभिन्न प्रकार की फिल्में बनती हैं। कुछ फिल्में केवल मनोरंजन के लिए होती हैं, जिनमें रोमांस और एक्शन शामिल होते हैं, जबकि अन्य समाज की समस्याओं को उजागर करती हैं। ऐसी फिल्मों को अक्सर विवादों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में दिल्ली शब्दोत्सव में, निर्देशक और लेखक एम.के. शिवाक्ष और फिल्म निर्माता बीरेंद्र भगत ने इस विषय पर अपने विचार साझा किए।
एम.के. शिवाक्ष ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन आवश्यक है, क्योंकि ये छोटे निर्देशकों और निर्माताओं को अपनी बात रखने का अवसर प्रदान करते हैं, जो समाज से संबंधित फिल्में बनाते हैं।
अपनी फिल्म 'गोधरा' के बारे में बात करते हुए, उन्होंने बताया कि यह फिल्म 2024 में रिलीज हो चुकी है, लेकिन इसे प्रोपेगेंडा कहकर नजरअंदाज किया गया है और इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जगह नहीं मिली। हालांकि, यह जल्द ही जी फाइव पर उपलब्ध होगी।
इस फिल्म के निर्माण में पांच साल लगे और सेंसर बोर्ड से इसे पास कराने में भी काफी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने दर्शकों से अपील की कि वे इसे एक बार जरूर देखें।
'हम दो हमारे बारह' के निर्माता बीरेंद्र भगत ने भी दिल्ली शब्दोत्सव में उन फिल्मों की चर्चा की, जो समाज का प्रतिबिंब होती हैं, लेकिन रिलीज से पहले ही विवादों में घिर जाती हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी जनसंख्या नियंत्रण की बात करते हैं, और उनकी फिल्म भी इसी विषय पर आधारित है। फिल्म में महिलाओं की समस्याओं को दर्शाया गया है, लेकिन उन पर एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है, जो कि गलत है।
उन्होंने आगे कहा कि आजकल अच्छी फिल्में बनाना और उन्हें रिलीज करना बहुत कठिन हो गया है। जनसंख्या के मुद्दे पर, उन्होंने बताया कि भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है और हमें समझना चाहिए कि जनसंख्या नियंत्रण कितना आवश्यक है, क्योंकि यह हमारे संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। पहले की तुलना में आज महंगाई अधिक है, जिससे अधिक बच्चों का पालन-पोषण करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
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