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क्या है फिल्म 'ओह माय डॉग' का संदेश? जानें अमित राय की अनकही बातें

फिल्म 'ओह माय डॉग' के निर्माता और निर्देशक अमित राय ने बताया कि यह फिल्म केवल एक कुत्ते की कहानी नहीं है, बल्कि यह मानव और अन्य जीवों के बीच संबंध और करुणा की भावना को उजागर करती है। उन्होंने अपने पालतू कुत्ते से मिली प्रेरणा के बारे में साझा किया और बताया कि कैसे जानवर इंसान को संवेदनशील बना सकते हैं। फिल्म का उद्देश्य दर्शकों को जीवों के प्रति सम्मान और करुणा की भावना जगाना है। यह फिल्म 07 अगस्त को रिलीज होने वाली है और इसमें पंकज त्रिपाठी जैसे कलाकार भी शामिल हैं।
 

फिल्म 'ओह माय डॉग' का उद्देश्य



पटना, 02 अगस्त (वेब वार्ता)। फिल्म 'ओह माय डॉग' के निर्माता, निर्देशक और लेखक अमित राय ने बताया कि यह फिल्म केवल एक कुत्ते की कहानी नहीं है, बल्कि यह मानव और अन्य जीवों के बीच संबंध, करुणा और सह-अस्तित्व की भावना को उजागर करती है। पटना में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान, उन्होंने 'यूनिवार्ता' से बातचीत में कहा कि इस फिल्म की प्रेरणा उन्हें अपने पालतू कुत्ते से मिली।


उन्होंने साझा किया कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वह अपने कुत्ते की देखभाल कर रहे हैं, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वास्तव में कुत्ता उन्हें जीवन के महत्वपूर्ण पाठ पढ़ा रहा था। इंसान अक्सर सोचता है कि वह जानवरों का पालन कर रहा है, जबकि कई बार वही जानवर इंसान को संवेदनशील बना देते हैं।


अमित राय ने कहा कि यह धरती केवल इंसानों के लिए नहीं बनी है। सभी जीवों का इस सृष्टि में समान अस्तित्व है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य अपनी बुद्धि के कारण खुद को श्रेष्ठ मानने लगा है, लेकिन प्रकृति ने किसी के लिए अलग नियम नहीं बनाए हैं।


प्रकृति और जीवों का संतुलन

राय ने कहा कि आजकल लोग शहरों से जानवरों को हटाने की बात कर रहे हैं, जबकि प्रकृति का संतुलन सभी जीवों के साथ मिलकर बनता है। यदि इस श्रृंखला की एक कड़ी भी टूटती है, तो इसका प्रभाव पूरे तंत्र पर पड़ता है।


उन्होंने महाभारत के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्मराज युधिष्ठिर ने स्वर्ग के द्वार पर अपने कुत्ते को छोड़ने से मना कर दिया था, जो मानव और पशु के बीच विश्वास और निष्ठा का प्रतीक है।


फिल्म की कहानी और निर्माण

अमित राय ने बताया कि फिल्म की कहानी उनके अपने अनुभवों से प्रेरित है। फिल्म की शूटिंग बिहार में की गई है, जिसमें स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।


राय ने बड़े सितारों के बिना फिल्म बनाने की चुनौती को स्वीकार किया और कहा कि यदि आपकी कहानी में दम है, तो उसे दर्शकों तक पहुंचाना जरूरी है। पंकज त्रिपाठी की मौजूदगी ने फिल्म को और भी आकर्षक बना दिया है।


कला और व्यवसाय का संतुलन

निर्देशक ने कहा कि फिल्म निर्माण को केवल व्यवसाय के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह एक रचनात्मक प्रक्रिया है, जिसमें कहानी और उद्देश्य सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि फिल्म अच्छी है, तो दर्शक उसे स्वीकार करते हैं।


उन्होंने कहा, "कला के क्षेत्र में पहले कहानी आती है और बाद में कारोबार।" पूरी टीम का उद्देश्य एक ऐसी फिल्म बनाना था, जो लोगों में करुणा और संवेदनशीलता की भावना जगाए।


बाल कलाकार और फिल्म का संदेश

फिल्म में अमित राय के बेटे माही राय ने भी अभिनय किया है। यह उनके बेटे की पहली फिल्म है, और उन्होंने खुद ऑडिशन दिया था। राय ने कहा कि अपने बेटे के साथ काम करना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि उन्हें पिता की बजाय निर्देशक की भूमिका निभानी पड़ी।


उन्होंने विश्वास जताया कि 'ओह माय डॉग' दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ इंसानों और जानवरों के रिश्तों को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करेगी।


फिल्म का निर्माण अमित राय, राजेश भारद्वाज और सना वारसी ने बाबूलाल बिस्कोप और थिंकिंग हैट्स एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया है। यह फिल्म 07 अगस्त को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।


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