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क्या भारतीय सिनेमा में फैंटेसी फिल्मों का जादू बढ़ रहा है?

भारतीय सिनेमा में फैंटेसी फिल्मों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। दर्शक अब केवल कहानियों की तलाश में नहीं हैं, बल्कि वे ऐसे अनुभव की चाह रखते हैं जो उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी से दूर ले जाए। निर्माता सूरज सिंह के अनुसार, यह समय भारतीय फैंटेसी सिनेमा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जानें इस ट्रेंड के पीछे की वजहें और दर्शकों की बदलती पसंद के बारे में।
 
क्या भारतीय सिनेमा में फैंटेसी फिल्मों का जादू बढ़ रहा है?

फैंटेसी फिल्मों का बढ़ता आकर्षण


मुंबई, 9 जनवरी। भारतीय फिल्म उद्योग में बदलाव की लहर तेजी से चल रही है। अब दर्शक केवल कहानियों की तलाश में नहीं हैं, बल्कि वे ऐसे सिनेमाई अनुभव की चाह रखते हैं जो उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी से दूर ले जाए। इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में फैंटेसी फिल्मों की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले यह जॉनर सीमित दर्शकों तक ही सीमित था, लेकिन अब यह दर्शकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।


पौराणिक कथाओं, लोककथाओं और आधुनिक कल्पना का संगम इस जॉनर को भारतीय दर्शकों के दिलों के करीब लाने में सफल रहा है।


फैंटेसी सिनेमा के बढ़ते प्रभाव पर बीलाइव प्रोडक्शन के मालिक और 'राहु केतु' के निर्माता सूरज सिंह ने कहा, "भारतीय सिनेमा के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण है। बड़े पैमाने पर बनने वाली फैंटेसी फिल्मों के लिए इससे बेहतर समय शायद ही कभी आया हो। आज का दर्शक नई दुनिया की खोज में है और वह ऐसी कहानियों को पसंद कर रहा है, जिनमें कल्पना के साथ-साथ हमारी संस्कृति और परंपराओं की झलक हो।"


सूरज सिंह ने आगे कहा, "फैंटेसी और पौराणिक कथाएं भारत में नई नहीं हैं। रामायण, महाभारत और लोककथाओं से जुड़ी कहानियां दशकों से दर्शकों को आकर्षित करती आ रही हैं, लेकिन आज इन कहानियों को पेश करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। आज का दर्शक केवल भावनात्मक कहानी नहीं चाहता, बल्कि वह भव्यता की भी अपेक्षा करता है। यही कारण है कि 'रामायण' और 'नागजिला' जैसी फिल्मों को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। लोग ऐसी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो उन्हें एक अलग दुनिया में ले जाएं।"


'राहु केतु' के बारे में बात करते हुए सूरज सिंह ने कहा, "इस फिल्म के साथ साल की शुरुआत होना भारतीय फैंटेसी सिनेमा के लिए एक सकारात्मक संकेत है। वीएफएक्स और आधुनिक तकनीक ने फिल्म निर्माताओं को अपनी कल्पनाओं को बड़े पर्दे पर जीवंत करने की शक्ति दी है। जब तकनीक कहानी के साथ मिलकर काम करती है, तो दर्शक पूरी तरह उस दुनिया में खो जाते हैं।"


--समाचार स्रोत


पीके/एएस



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