क्या भारतीय सिनेमा ने ऑस्कर में अपनी जगह बना ली? जानिए 'तन्वी द ग्रेट' और 'पारो' की कहानी!
भारतीय सिनेमा की नई ऊंचाइयाँ
मुंबई, 17 जनवरी। भारतीय फिल्म उद्योग इस समय अनुभवी कलाकारों और नवोदित प्रतिभाओं के साथ एक नई दिशा में बढ़ रहा है। भावनात्मक कथानकों से लेकर सांस्कृतिक गहराई वाली फिल्मों ने न केवल कलाकारों की सीमाओं को चुनौती दी है, बल्कि उनके स्क्रीन व्यक्तित्व को भी नया रूप दिया है।
हाल ही में, ऑस्कर 2026 की योग्यता सूची में कई भारतीय फिल्मों का नाम शामिल होने से ये फिल्में चर्चा का विषय बन गई हैं।
अनुपम खेर की फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' में उन्होंने निर्देशन के साथ-साथ मुख्य भूमिका भी निभाई है। यह फिल्म एक ऑटिज्म से ग्रसित युवती की कहानी है, जो अपने दिवंगत पिता की याद में सेना में शामिल होने का सपना देखती है। अनुपम का अभिनय इस फिल्म में गहराई और संवेदनशीलता से भरा हुआ है। फिल्म ने 100 दिनों तक थिएटर में सफलता हासिल की और अब ऑस्कर 2026 की बेस्ट पिक्चर योग्यता सूची में जगह बनाई है।
ऋषभ शेट्टी की 'कांतारा: चैप्टर 1' ने 'कांतारा' की सफलता के बाद दर्शकों का ध्यान खींचा है। इस बार की कहानी में पौराणिक और पारंपरिक तत्वों को और गहराई से दर्शाया गया है। ऋषभ की उपस्थिति फिल्म को एक सांस्कृतिक यात्रा में बदल देती है।
ईशान खट्टर की फिल्म 'होमबाउंड' में उन्होंने अपने अभिनय से सभी को प्रभावित किया है। यह फिल्म दो दोस्तों की दोस्ती और सामाजिक असमानता की कहानी है। ईशान की सहज और संवेदनशील एक्टिंग उनके व्यक्तित्व के संघर्ष को उजागर करती है। यह फिल्म उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
ताहा शाह बदुशा 'पारो: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ब्राइड स्लेवरी' में नजर आएंगे, जो दुल्हन खरीद-फरोख्त जैसी सामाजिक समस्या पर आधारित है। ताहा का किरदार भावनात्मक गहराई से भरा है और फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में सराहना प्राप्त की है।
जैसे-जैसे भारतीय मनोरंजन उद्योग आगे बढ़ रहा है, कुछ फिल्मों की कहानियों में भावनाओं और संस्कृति को अधिक महत्व दिया जा रहा है। इन सभी कलाकारों की नई ऊर्जा यह दर्शाती है कि आज के समय में दमदार अभिनय भी कहानी की असली ताकत बन सकता है।
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