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क्या परेश रावल का गुजरात में फिल्म पुरस्कार समारोह का समर्थन सही है?

अभिनेता परेश रावल ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को गुजरात में आयोजित करने के निर्णय का समर्थन किया है। उनका कहना है कि हर राज्य को ऐसे राष्ट्रीय आयोजनों की मेज़बानी का अवसर मिलना चाहिए। इस निर्णय पर विवाद भी उठ रहा है, खासकर महाराष्ट्र के नेताओं द्वारा। रावल ने इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से अलग रखते हुए, इसे देश के विभिन्न हिस्सों को अवसर देने वाला कदम बताया है। जानें इस मुद्दे पर उनके विचार और समारोह के आयोजन का महत्व।
 

परेश रावल का गुजरात में फिल्म पुरस्कार समारोह का समर्थन

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को गुजरात में आयोजित करने के निर्णय पर चल रहे विवाद के बीच, अभिनेता परेश रावल ने इस कदम का समर्थन किया है। उनका मानना है कि हर राज्य को ऐसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों की मेज़बानी का अवसर मिलना चाहिए। मीडिया से बातचीत में, परेश रावल ने समारोह के गुजरात में होने पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि गुजरात भारत का हिस्सा है और वहां इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होना उचित है।


‘क्या गुजरात बांग्लादेश या पाकिस्तान में है?’

‘क्या गुजरात बांग्लादेश या पाकिस्तान में है?’

परेश रावल ने स्पष्ट किया, “क्या गुजरात बांग्लादेश या पाकिस्तान में है? यह हमारे देश का हिस्सा है। तो फिर यह कार्यक्रम गुजरात में क्यों नहीं हो सकता?” उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का आयोजन विभिन्न राज्यों में होना चाहिए, ताकि हर क्षेत्र को इससे जुड़ने का अवसर मिले। अभिनेता ने कहा, “मेरी राय है कि देश के हर राज्य में ऐसे आयोजन होने चाहिए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।”


दिल्ली से गुजरात स्थानांतरित करने पर विवाद

दिल्ली से गुजरात स्थानांतरित करने पर विवाद

वास्तव में, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के 72 साल के इतिहास में पहली बार इसे दिल्ली से बाहर गुजरात में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद, महाराष्ट्र के कुछ नेताओं ने इसका विरोध किया है। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने समारोह को गुजरात स्थानांतरित करने की आलोचना की थी। इसके अलावा, शिवसेना सांसद संजय राउत ने कलाकारों से समारोह का बहिष्कार करने की अपील की थी।


परेश रावल का अलग दृष्टिकोण

परेश रावल का अलग दृष्टिकोण

जहां कुछ नेता इसे राजनीतिक निर्णय मानते हैं, वहीं परेश रावल ने इसे देश के विभिन्न हिस्सों को अवसर देने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन किसी एक शहर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सभी राज्यों को ऐसे आयोजनों में भागीदारी का मौका मिलना चाहिए। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है, जो हर साल उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों और फिल्मों को सम्मानित करता है।


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