क्या जीवन और मृत्यु के बीच का संघर्ष दर्शाता है नाटक 'फंदी'? जानें इसकी कहानी!
नाटक 'फंदी' का मंचन: जीवन और मृत्यु के जटिल सवाल
सूरत में, डॉ. शंकर शेष द्वारा लिखित नाटक 'फंदी' का प्रदर्शन अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में हुआ। यह नाटक जीवन और मृत्यु के बीच मानवीय संवेदनाओं, पीड़ा और इच्छा मृत्यु जैसे जटिल मुद्दों पर केंद्रित है। इसे सूरत महानगर पालिका द्वारा आयोजित संजीवकुमार नाट्य स्पर्धा में राजग्रुप थियेटर ने प्रस्तुत किया।
राजेश पाण्डेय के निर्देशन में 'फंदी' उस स्थिति को उजागर करता है, जब गंभीर बीमारी और असहनीय पीड़ा के कारण जीवन यातना में बदल जाता है। यह नाटक इस मानवीय द्वंद्व के माध्यम से यह सवाल उठाता है कि जब कोई व्यक्ति बीमारी से जूझते हुए मृत्यु की कामना करने लगे, तो उसके जीवन और मृत्यु के निर्णय को किस दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
कहानी एक कैंसर से पीड़ित पिता और उसके बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है। पिता, जो असहनीय पीड़ा में है, मृत्यु की इच्छा करता है, और बेटा उसे अपने हाथों से मृत्यु देता है। इसके बाद बेटे के खिलाफ अदालत में मुकदमा शुरू होता है। अदालत की कार्यवाही के दौरान कानून, करुणा, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं के कई पहलू सामने आते हैं।
नाटक दर्शकों को इस प्रश्न से परिचित कराता है कि क्या हर परिस्थिति में जीवन को बनाए रखना सर्वोच्च मानवीय मूल्य है, या ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति की पीड़ा और इच्छा को भी समझा जाना चाहिए, जो गंभीर बीमारी के कारण लगातार यातना झेल रहा हो।
इस प्रस्तुति में फंदी की भूमिका मिहिर पाठक ने निभाई, जबकि वकील के रूप में राजेश पाण्डेय, हवलदार की भूमिका में सिद्धार्थ चौहान और पिता के किरदार में अजय मार्डिया मंच पर दिखाई दिए।
नाटक का संगीत वैभव मुकेश देसाई ने तैयार किया, और उन्होंने संगीत संचालन तथा प्रकाश संयोजन की जिम्मेदारी भी संभाली। मंच सज्जा राजेश पाण्डेय, रंगभूषा मिनी आर्च सोमैया और नेपथ्य अनामिका राजेश पाण्डेय ने संभाला।
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