क्या आपने देखी है नेटफ्लिक्स की 'अजीब दास्तां'? जानें इस फिल्म की खास बातें!
नेटफ्लिक्स की एंथोलॉजी फिल्म 'अजीब दास्तां' का जश्न
मुंबई, 16 अप्रैल। भारतीय सिनेमा में जब भी बेहतरीन अभिनय और गहरी भावनाओं से भरी फिल्मों की चर्चा होती है, तो नेटफ्लिक्स की एंथोलॉजी फिल्म 'अजीब दास्तां' का नाम अवश्य लिया जाता है। इस फिल्म ने गुरुवार को अपने रिलीज के छह साल पूरे कर लिए। फिल्म के एक महत्वपूर्ण हिस्से 'अनकही' में शेफाली शाह ने 'नताशा' का किरदार निभाया था।
इस अवसर पर, अभिनेत्री ने अपने इंस्टाग्राम पर फिल्म से जुड़ी पुरानी यादों को ताजा करते हुए एक सीन साझा किया। उन्होंने लिखा, "आंखें, चीखें, कभी झूठ नहीं बोलतीं। फिल्म 'अजीब दास्तां' के 6 साल पूरे।"
यह फिल्म कायोजी द्वारा निर्देशित 'अजीब दास्तां' की चौथी कहानी है, जिसमें शेफाली ने नताशा की मुख्य भूमिका निभाई है। नताशा (शेफाली शाह) और रोहन (तोता रॉय चौधरी) की एक बेटी है, समायरा, जिसकी सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही है। नताशा अपनी बेटी से संवाद करने के लिए साइन लैंग्वेज सीखती है, जबकि रोहन अपने काम में इतना व्यस्त रहता है कि उसकी बेटी से दूरी बढ़ती जाती है। नताशा और रोहन के रिश्ते में भी दरार आ जाती है, जैसे रेत का महल जो कभी भी ढह सकता है।
इस बीच, नताशा की मुलाकात एक फोटोग्राफर (मानव कौल) से होती है, जो न बोल सकता है और न सुन सकता है। दोनों साइन लैंग्वेज के माध्यम से संवाद करते हैं और पहली मुलाकात में ही उनके बीच नजदीकियां बढ़ने लगती हैं। धीरे-धीरे, वे एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिताने लगते हैं।
'अजीब दास्तां' एक एंथोलॉजी है, जिसमें चार अलग-अलग कहानियां शामिल हैं। ये कहानियां अचानक ऐसी परिस्थितियों में किरदारों को डालती हैं, जहां उनके अंदर छिपी उलझी और असहज भावनाएं बाहर आ जाती हैं। इन चारों कहानियों में जलन, पूर्वाग्रह, लाचारी, हक जताने की भावना और रिश्तों की बिगड़ती स्थिति को दर्शाया गया है।
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