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क्या आप जानते हैं 'लग जा गले' के पीछे का दिलचस्प किस्सा? जानें राज खोसला की कहानी!

क्या आप जानते हैं कि 'लग जा गले' गाने को पहले राज खोसला ने नकार दिया था? जानें इस गाने के पीछे की दिलचस्प कहानी और कैसे मनोज कुमार ने इसे फिल्म में बनाए रखने में मदद की। यह गाना आज भारतीय संगीत का एक अमूल्य हिस्सा बन चुका है। पढ़ें पूरी कहानी!
 
क्या आप जानते हैं 'लग जा गले' के पीछे का दिलचस्प किस्सा? जानें राज खोसला की कहानी!

राज खोसला और 'लग जा गले' का अनकहा किस्सा


मुंबई, 30 मई। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गाने ऐसे हैं जो पीढ़ियों से लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। 'लग जा गले' भी उनमें से एक है। यह गाना हिंदी फिल्म संगीत के सबसे प्रिय और कालातीत गीतों में से एक माना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्म के निर्देशक राज खोसला को जब यह गाना पहली बार सुनाया गया था, तो उन्हें यह पसंद नहीं आया। यदि अभिनेता मनोज कुमार ने उस समय पहल नहीं की होती, तो शायद यह गाना आज हमारे पास नहीं होता।


31 मई को राज खोसला का जन्मदिन है। इस मौके पर हम उनके साथ जुड़े एक दिलचस्प किस्से को साझा करते हैं, जो उनकी फिल्म 'वो कौन थी' के गाने 'लग जा गले' से संबंधित है।


राज खोसला का जन्म 31 मई 1925 को पंजाब में हुआ था। वे हिंदी सिनेमा के उन निर्देशकों में से एक थे जिन्होंने थ्रिलर, सस्पेंस, रोमांस, एक्शन और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों को नई पहचान दी। उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी विशेषता थी रहस्य, रोमांच और मजबूत कहानी। यही कारण है कि उन्होंने अपने समय में कई यादगार फिल्में बनाई।


राज खोसला और अभिनेत्री साधना की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को तीन ऐसी फिल्में दीं, जिन्हें आज भी सस्पेंस फिल्मों के क्लासिक उदाहरण माना जाता है। इनमें 'वो कौन थी', 'मेरा साया' और 'अनीता' शामिल हैं। इन फिल्मों में रहस्य और रोमांच का ऐसा ताना-बाना बुना गया था, जिसने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।


1964 में रिलीज हुई 'वो कौन थी' में साधना और मनोज कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म का संगीत मदन मोहन ने तैयार किया था, जिसमें 'लग जा गले' जैसे अमर गीत को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी। आज यह गाना विश्वभर में संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है।


मदन मोहन के बेटे समीर कोहली ने एक इंटरव्यू में इस गाने से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि जब मदन मोहन ने पहली बार 'लग जा गले' की धुन बनाई और राज खोसला को सुनाई, तो उन्होंने इसे सुनकर निराशा जताई। राज खोसला को लगा कि यह धुन फिल्म की स्थिति के अनुरूप नहीं है। उन्होंने मदन मोहन से कहा कि उन्हें ऐसी धुन की उम्मीद नहीं थी और वहां से चले गए।


हालांकि, मदन मोहन इस धुन के प्रति पूरी तरह आश्वस्त थे। बाद में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें निर्माता, गीतकार और अभिनेता मनोज कुमार भी शामिल थे। मनोज कुमार ने राज खोसला से एक बार फिर धुन सुनने का अनुरोध किया। जब मदन मोहन ने दोबारा यह धुन सुनाई, तो राज खोसला का नजरिया पूरी तरह बदल गया। गीत की खूबसूरती और भावनात्मक गहराई को महसूस करते ही उन्होंने अपनी पहले की राय बदल दी। जब मदन जी ने खुद गाकर सुनाया, तो राज खोसला ने कहा, 'मैं अपना जूता उठाकर अपने सिर पर मारना चाहता हूं। मैंने इस ट्यून को मना कैसे कर दिया?'


मनोज कुमार गर्व से कहा करते थे कि उन्होंने इस गीत को फिल्म में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। समय ने साबित कर दिया कि यह निर्णय कितना सही था। आज 'लग जा गले' केवल एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की धरोहर बन चुका है।


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