क्या आप जानते हैं मजरूह सुल्तानपुरी की संघर्ष भरी कहानी? एक गीत के पीछे का दिलचस्प किस्सा!
मजरूह सुल्तानपुरी: एक अद्वितीय गीतकार की कहानी
नई दिल्ली, 30 सितंबर। "इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल…" यह गाना फिल्म 'धरम करम' का है, जो आज भी लोगों के दिलों में गूंजता है। मुकेश की आवाज, आरडी बर्मन का संगीत और मजरूह सुल्तानपुरी के बोल ने इसे एक अमर गीत बना दिया है, जिसे कई पीढ़ियाँ गुनगुनाती हैं। लेकिन इस गीत के पीछे की कहानी उतनी ही दिलचस्प है।
मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म 1 अक्टूबर 1919 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में हुआ। वह केवल एक गीतकार नहीं थे, बल्कि अपने समय के प्रसिद्ध शायर और प्रगतिशील लेखक आंदोलन के महत्वपूर्ण सदस्य भी थे। उनके विचार स्पष्ट थे और उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाकी से लिखा।
1940 के दशक के अंत में, देश का राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण था। मजरूह के वामपंथी विचारों के कारण उन्हें सरकारी कार्रवाई का सामना करना पड़ा और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
कहा जाता है कि जेल में रहते हुए भी मजरूह ने लिखना नहीं छोड़ा। कठिन परिस्थितियों के बावजूद, उनके शब्दों पर पकड़ मजबूत बनी रही। इसी दौरान उन्होंने एक कविता लिखी, जो बाद में एक प्रसिद्ध फिल्मी गीत का हिस्सा बनी।
जेल में मजरूह के परिवार को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। राज कपूर को उनकी मुश्किलों का पता चला और उन्होंने मदद की पेशकश की। हालांकि, मजरूह ने सीधे पैसे लेने से मना कर दिया और कहा कि उन्हें काम चाहिए। राज कपूर ने उन्हें एक गीत लिखने के लिए कहा, और मजरूह ने जेल में लिखी अपनी रचना उन्हें दी। यह रचना बाद में राज कपूर की फिल्म 'धरम करम' में शामिल की गई।
मजरूह सुल्तानपुरी ने अपने लंबे करियर में हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए और उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
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