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क्या आप जानते हैं बॉलीवुड की मां निरूपा रॉय का अनसुना किस्सा?

निरूपा रॉय, जिन्हें 'बॉलीवुड की मां' कहा जाता है, ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। जानें उनके जीवन के अनसुने किस्से, जैसे कि फिल्म 'दो बीघा जमीन' के दौरान की एक मजेदार घटना। निरूपा रॉय का करियर 300 से अधिक फिल्मों में फैला है, और उनकी भूमिकाएं आज भी भारतीय सिनेमा में एक मिसाल बनी हुई हैं।
 
क्या आप जानते हैं बॉलीवुड की मां निरूपा रॉय का अनसुना किस्सा?

निरूपा रॉय: बॉलीवुड की अमिट छाप छोड़ने वाली अभिनेत्री


मुंबई, 3 जनवरी। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। उनमें से एक प्रमुख नाम है निरूपा रॉय, जिन्हें 'बॉलीवुड की मां' के नाम से भी जाना जाता है। उनकी मां की भूमिकाएं इतनी वास्तविक होती थीं कि दर्शक उन्हें अपनी असली मां मान लेते थे। वह हर किरदार में जान डाल देती थीं, जिससे दर्शक उनकी एक्टिंग को सच मान लेते थे।


उनकी अदाकारी का एक दिलचस्प किस्सा 1953 में आई फिल्म 'दो बीघा जमीन' से जुड़ा है। निरूपा रॉय ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म की शूटिंग कोलकाता में हो रही थी। उन्हें और बलराज साहनी को पति-पत्नी का किरदार निभाना था। निर्देशक बिमल रॉय ने उन्हें बताया कि टैक्सी में कैमरा लगा रहेगा और उन्हें सड़क पार करनी है। जैसे ही वे सड़क पार कर रहे थे, बलराज साहनी को हल्की चोट लग गई।


निरूपा रॉय ने हंसते हुए कहा, “यह देखकर वहां खड़ी भीड़ गुस्सा हो गई और हमें बुरा-भला कहने लगी। अब हम उन्हें कैसे समझाते कि हम एक्टिंग कर रहे हैं? यह तो इतनी सच्ची लग रही थी कि लोग समझ ही नहीं सके कि यह केवल एक फिल्म का सीन है।”


निरूपा रॉय का जन्म 4 जनवरी 1931 को गुजरात के वलसाड में हुआ था। उनका असली नाम कोकिला किशोरचंद्र बालसराफ था। कम उम्र में ही उनकी शादी कमल रॉय से हो गई, जो मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री में किस्मत आजमाना चाहते थे। दोनों ने मुंबई की ओर रुख किया। कमल तो सफल नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने निरूपा को मौका दिलाने का फैसला किया। दोनों ने गुजराती फिल्म 'रणकदेवी' (1946) के लिए ऑडिशन दिया। कमल रिजेक्ट हो गए, लेकिन निरूपा को मुख्य भूमिका मिल गई। यहीं से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ।


अपने करियर के प्रारंभिक चरण में निरूपा रॉय ने धार्मिक और पौराणिक फिल्मों में काम किया। 'हर हर महादेव', 'नागपंचमी' और 'रानी रूपमती' जैसी फिल्मों में उन्होंने देवी के किरदार निभाए। इसके बाद 'दो बीघा जमीन' में उनके अभिनय को सराहा गया, लेकिन उन्हें असली पहचान 1975 की फिल्म 'दीवार' से मिली, जिसमें उन्होंने अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की मां का किरदार निभाया। यह भूमिका इतनी प्रभावशाली थी कि इसके बाद वे बॉलीवुड की 'मां' के रूप में मशहूर हो गईं।


1970 से 90 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में मां के किरदार निभाए। उनके किरदारों में दर्द, त्याग और ममता की गहराई इतनी थी कि उन्हें 'क्वीन ऑफ मिसरी' भी कहा जाने लगा। निरूपा रॉय ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया।


13 अक्टूबर 2004 को निरूपा रॉय का निधन हो गया। आज भी उनकी भूमिकाएं भारतीय सिनेमा में एक मिसाल बनी हुई हैं।


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