क्या आप जानते हैं ऑस्कर अवॉर्ड्स के पीछे की दिलचस्प कहानियाँ?
ऑस्कर अवॉर्ड्स का भव्य समारोह
लॉस एंजेलिस में आज रात 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स का आयोजन हो रहा है, जो सिनेमा की दुनिया का एक प्रमुख और प्रतिष्ठित इवेंट है। यह समारोह उन उत्कृष्ट फिल्मों, अभिनेताओं, निर्देशकों और अन्य कलाकारों के योगदान को मान्यता देगा, जो 2025 में रिलीज हुई थीं।
भारतीय दर्शक इसे 16 मार्च की सुबह लाइव देख सकेंगे। अमेरिका में यह शो 15 मार्च को शाम 7 बजे ईस्टर्न टाइम (ईटी) से शुरू होगा, जो भारत में सुबह 4:30 बजे (आईएसटी) प्रसारित होगा।
भारत में, जियोहॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर सुबह 4:30 बजे से लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध होगी। इसके अलावा, स्टार मूवीज चैनल पर भी इसी समय टीवी पर सीधा प्रसारण होगा। यदि आप सुबह नहीं देख पाते हैं, तो जियोहॉटस्टार पर बाद में पूरा शो उपलब्ध रहेगा और स्टार मूवीज पर शाम 9 बजे इसका रिपीट टेलीकास्ट होगा।
ऑस्कर अवॉर्ड्स के बारे में कई रोचक तथ्य हैं। सबसे पहले, हम इसे 'ऑस्कर' के नाम से जानते हैं, जबकि इसका असली नाम एकेडमी अवॉर्ड ऑफ मेरिट है। यह उपनाम 'ऑस्कर' इतना प्रसिद्ध हो गया है कि अब इसे इसी नाम से जाना जाता है।
इस नाम के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। 1930 के दशक में, एकेडमी की लाइब्रेरियन मार्गरेट हेरिक ने पहली बार प्रतिमा को देखकर मजाक में कहा था कि यह उनके चाचा ऑस्कर जैसी दिखती है। यह नाम इतना लोकप्रिय हो गया कि 1934 में इसे अखबारों में इस्तेमाल किया जाने लगा और 1939 में इसे आधिकारिक रूप से अपनाया गया। आज, ऑस्कर शब्द फिल्म पुरस्कारों का प्रतीक बन चुका है।
एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि विजेता अपनी ऑस्कर प्रतिमा को नहीं बेच सकते। 1951 से, एकेडमी ने यह नियम लागू किया है कि यदि कोई विजेता या उनके वारिस इस प्रतिमा को बेचना चाहें, तो उन्हें पहले इसे एक डॉलर में एकेडमी को वापस ऑफर करना होगा। यह नियम ऑस्कर के सम्मान को बनाए रखने के लिए है।
प्रतिमा की बनावट भी खास है। यह 13.5 इंच (लगभग 34 सेमी) ऊँची और 8.5 पाउंड (करीब 3.85 किलो) भारी होती है। यह ठोस ब्रॉन्ज से बनी होती है, जिस पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई जाती है।
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