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क्या आज की युवा पीढ़ी के पास बेहतर संसाधन हैं? सुबोध भावे का दिलचस्प नजरिया

अभिनेता सुबोध भावे ने हाल ही में अपनी फिल्म 'श्री बाबा नीब करोरी महाराज' के संदर्भ में युवा पीढ़ी के संसाधनों और उनके उपयोग पर विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि आज के युवा कलाकारों के पास पहले से अधिक अवसर हैं और वे अपनी कला को निखारने के लिए मेहनत कर रहे हैं। सुबोध ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया को कला में गिरावट का कारण नहीं माना जा सकता। जानें उनके विचार और फिल्म के बारे में अधिक जानकारी।
 
क्या आज की युवा पीढ़ी के पास बेहतर संसाधन हैं? सुबोध भावे का दिलचस्प नजरिया

सुबोध भावे की नई फिल्म और युवा पीढ़ी की संभावनाएं




मुंबई, 30 मई। अभिनेता सुबोध भावे वर्तमान में अपनी फिल्म 'श्री बाबा नीब करोरी महाराज' के कारण चर्चा में हैं। उनका मानना है कि आज की युवा पीढ़ी के पास पुराने समय की तुलना में अधिक संसाधन उपलब्ध हैं और वे इनका सही उपयोग कर रहे हैं।


सुबोध ने एक बातचीत में कहा कि नए कलाकारों के पास पहले से कहीं अधिक अवसर और साधन हैं। उन्होंने यह भी कहा, "अगर हमारे समय में सोशल मीडिया होता, तो हम भी इसका इसी तरह उपयोग करते। युवा कलाकार पूरी ईमानदारी से अपने तरीके से खुद को खोजने और निखारने का प्रयास कर रहे हैं।"


उनका यह भी कहना है कि सोशल मीडिया को कला में गिरावट का कारण नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह आज के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।


उन्होंने आगे कहा, "मैं देखता हूं कि युवा कलाकार केवल सोशल मीडिया पर समय नहीं बिताते, बल्कि वे अभिनय की बारीकियों को सीखने के लिए वर्कशॉप में भाग लेते हैं और खुद को बेहतर बनाने के लिए नए तरीके खोजते हैं।"


सुबोध भावे को फिल्म उद्योग में व्यावसायिक और कलात्मक सिनेमा के बीच संतुलन बनाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने युवा कलाकारों को सलाह देते हुए कहा, "हर कलाकार का अपना अलग सफर होता है और कला को देखने का नजरिया भी भिन्न होता है। मेरे लिए कमर्शियल और कलात्मक सिनेमा का कोई अंतर नहीं है। मैं बस ऐसी कहानियां और किरदार चुनता हूं जो मुझे एक अभिनेता के रूप में प्रेरित करें।"


जब उनसे पूछा गया कि क्या आध्यात्मिक किरदार निभाने वाले अभिनेताओं पर सामाजिक जिम्मेदारी होती है, तो सुबोध ने कहा, "मैंने महाराज जी का किरदार पूरी श्रद्धा और ईमानदारी से निभाया, लेकिन असल जिंदगी में मैं महाराज जी नहीं हूं। मैं एक अभिनेता हूं और आगे भी विभिन्न प्रकार के किरदार निभाता रहूंगा, जिनमें नकारात्मक भूमिकाएं भी शामिल हो सकती हैं।"


उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का उदाहरण देते हुए कहा, "एक मशहूर खिलाड़ी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल हटाकर पानी की बोतल रखी थी। इससे कंपनी के शेयरों में गिरावट आई, क्योंकि उनके इस कार्य ने समाज को एक संदेश दिया। इसी तरह, सार्वजनिक हस्तियों को अपने प्रभाव का ध्यान रखना चाहिए।"


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