क्या 18वें इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री फेस्टिवल में 31 फिल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक? जानें पूरा सच!
फिल्म फेस्टिवल में विवाद: 31 फिल्मों की स्क्रीनिंग पर सवाल
नई दिल्ली, 21 सितंबर। 18वें इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल (आईडीएसएफएफके) के आयोजन से पहले ही एक विवाद ने जन्म ले लिया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर एक समाचार पत्र की रिपोर्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने फेस्टिवल में चयनित 31 फिल्मों की स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं दी है।
थरूर ने इस निर्णय पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा और सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद मंत्रालय ने थरूर के पोस्ट को रीशेयर करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी फिल्म की स्क्रीनिंग की अनुमति को खारिज नहीं किया गया है।
केरल का यह फिल्म फेस्टिवल 25 से 30 सितंबर तक तिरुवनंतपुरम में आयोजित होने वाला है। हाल ही में आई रिपोर्ट में कहा गया कि 31 फिल्मों को स्क्रीनिंग के लिए मना किया गया है, जिनमें फेस्टिवल की आधिकारिक सूची में शामिल 18 फिल्में, इंटरनेशनल नॉन-फिक्शन सेक्शन की 9 फिल्में, फेस्टिवल विनर्स कैटेगरी की 3 फिल्में और नेपाल पैकेज की एक फिल्म शामिल हैं।
रिपोर्ट में उल्लेखित फिल्मों में 'पार्लियामेंट स्ट्रीट', 'सैनिटाइज्ड रिपब्लिक: कास्ट एंड कॉन्ट्रैक्ट्स', 'ग्लोब', 'मेमोरीज ऑफ ए विंडो', 'बर्ड्स ऑफ वॉर', 'पुट योर सोल ऑन योर हैंड एंड वॉक' और 'अवर लैंड' जैसे शीर्षक शामिल हैं। इनमें से 'ग्लोब' एक मलयालम फिल्म है, जबकि 'पुट योर सोल ऑन योर हैंड एंड वॉक' गाजा में रहने वाली एक फिलिस्तीनी फोटो जर्नलिस्ट की कहानी को दर्शाती है। 'मेमोरीज ऑफ ए विंडो' ईरान में हुए प्रदर्शनों को आम लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए फुटेज के माध्यम से प्रस्तुत करती है। 'बर्ड्स ऑफ वॉर' में युद्ध और विस्थापन से जुड़ी व्यक्तिगत तस्वीरों और आर्काइव का उपयोग किया गया है।
फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए सर्टिफिकेशन की एक अलग प्रक्रिया होती है। रिपोर्टों के अनुसार, केरल चलचित्र एकेडमी ने कुल 347 फिल्मों की सूची सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भेजी थी और स्क्रीनिंग के लिए आवश्यक छूट मांगी थी, जिसके बाद 31 फिल्मों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।
इस मुद्दे पर केरल के पर्यटन, संस्कृति और सिनेमा मंत्री पीसी विष्णुनाध ने भी केंद्र से पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में समाज की विभिन्न सच्चाइयों और दृष्टिकोणों को उजागर करने का माध्यम हैं। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में विभिन्न विचारों और चर्चाओं के लिए स्थान होना चाहिए, ताकि दर्शक फिल्में देखकर अपनी राय बना सकें।
इस बीच, शशि थरूर ने एक्स पर एक समाचार पत्र की खबर साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, ''मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि 31 फिल्मों को स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं दी गई है। यह न केवल भारत की परंपरा के साथ धोखा है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी हमला है। इस तरह के निर्णय से विश्वभर के फिल्म निर्माताओं, लेखकों और कलाकारों के बीच भारत की छवि प्रभावित होती है। मैं सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से अनुरोध करता हूं कि इस निर्णय पर पुनर्विचार करें।''
थरूर के पोस्ट के बाद, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने मामले पर अपनी सफाई दी। मंत्रालय ने उनके पोस्ट को रीशेयर करते हुए कहा, ''18वें इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल में किसी भी फिल्म की स्क्रीनिंग की अनुमति से इंकार नहीं किया गया है। छह फिल्मों से अधिक विस्तृत सारांश देने के लिए कहा गया है। फिल्मों के विषय को देखते हुए कुछ फिल्मों को संबंधित सेक्टरल अथॉरिटीज के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है।''
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