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कौन हैं वसुंधरा कोमकली? जानें हिंदुस्तानी संगीत की अमर आवाज की कहानी

वसुंधरा कोमकली, जिन्हें 'वसुंधरा ताई' के नाम से जाना जाता है, भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक प्रमुख हस्ती हैं। महज 12 साल की उम्र में कुमार गंधर्व से मिलीं, जिन्होंने उनके जीवन को बदल दिया। जानें उनके संगीत सफर, पुरस्कार और परिवार की संगीत परंपरा के बारे में।
 
कौन हैं वसुंधरा कोमकली? जानें हिंदुस्तानी संगीत की अमर आवाज की कहानी

वसुंधरा कोमकली: संगीत की दुनिया में एक अनमोल नाम




मुंबई, 22 मई। भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में वसुंधरा कोमकली, जिन्हें लोग प्यार से 'वसुंधरा ताई' के नाम से जानते हैं, का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। उन्होंने अपनी मधुर आवाज और गहरी समझ के साथ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को नई पहचान दी। उनके जीवन का एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब महज 12 साल की उम्र में उनकी मुलाकात प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व से हुई। इस मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने शास्त्रीय संगीत सीखने का निर्णय लिया।


वसुंधरा का जन्म 23 मई 1931 को झारखंड के जमशेदपुर में हुआ। उनके परिवार का माहौल संगीत से भरा हुआ था, जिससे उनका झुकाव संगीत की ओर बचपन से ही था।


कहा जाता है कि जब वसुंधरा केवल 12 वर्ष की थीं, तब उन्होंने कोलकाता में एक संगीत सम्मेलन में पहली बार कुमार गंधर्व को देखा। उनकी गायकी ने वसुंधरा पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने तुरंत कुमार गंधर्व से शास्त्रीय संगीत सीखने की इच्छा व्यक्त की। हालांकि, द्वितीय विश्व युद्ध के कारण वह मुंबई नहीं जा सकीं।


वसुंधरा ने कोलकाता में रहकर संगीत की शिक्षा जारी रखी और जल्द ही ऑल इंडिया रेडियो के कोलकाता सेंटर पर गाना शुरू कर दिया। उनकी आवाज और सुरों की गहराई ने उन्हें जल्दी ही पहचान दिलाई।


युद्ध समाप्त होने के बाद, 1946 में वसुंधरा मुंबई पहुंचीं और वहां उन्होंने प्रसिद्ध संगीतज्ञ प्रोफेसर बी.आर. देवधर से संगीत की शिक्षा ली। बाद में, उन्होंने कुमार गंधर्व से फिर से संगीत की बारीकियां सीखना शुरू किया। दोनों ने लंबे समय तक साथ काम किया और 1962 में शादी कर ली। इसके बाद वसुंधरा देवास में बस गईं, जहां से उनके संगीत जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ।


वसुंधरा ने कई वर्षों तक कुमार गंधर्व के साथ मंच साझा किया। वह अक्सर उनके पीछे बैठकर तानपुरा संभालती थीं और सुरों में उनका साथ देती थीं। धीरे-धीरे, वह खुद शास्त्रीय संगीत की एक मजबूत आवाज बन गईं। उन्होंने खयाल गायकी के साथ-साथ भजन, लोकगीत और पारंपरिक रचनाओं को भी अपनी आवाज में प्रस्तुत किया।


भारत सरकार ने 2006 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके अलावा, उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।


वसुंधरा की बेटी कलापिनी कोमकली भी एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका हैं, जो परिवार की संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। उनके पोते भुवनेश कोमकली भी संगीत के क्षेत्र में सक्रिय हैं।


29 जुलाई 2015 को वसुंधरा कोमकली का निधन मध्य प्रदेश के देवास में दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उन्होंने 84 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली।


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