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कौन हैं डॉ. गंगूबाई हंगल? भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनमोल धरोहर

डॉ. गंगूबाई हंगल, भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक महान हस्ती, ने अपने संघर्षों के बावजूद संगीत की दुनिया में अद्वितीय पहचान बनाई। कर्नाटक की पहली महिला गायिका, जिन्होंने सवाई गंधर्व से शिक्षा ली, गंगूबाई का जीवन संगीत के प्रति समर्पित रहा। उनके योगदान से स्थापित गुरुकुल आज भी नई पीढ़ी को संगीत की शिक्षा दे रहा है। जानें उनके जीवन की प्रेरणादायक कहानी और संगीत में उनके योगदान के बारे में।
 
कौन हैं डॉ. गंगूबाई हंगल? भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनमोल धरोहर

भारतीय संगीत की महान हस्ती




नई दिल्ली, 4 मार्च। जब भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान हस्तियों का नाम लिया जाता है, तो डॉ. गंगूबाई हंगल का नाम अवश्य आता है। उनकी आवाज़ और सुरों की गहराई ने किराना घराने को एक नई पहचान दी। वह कर्नाटक की पहली महिला गायिका थीं, जिन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए पूरे देश में संगीत के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।


सामाजिक चुनौतियों के बावजूद, गंगूबाई ने मेहनत और समर्पण से महानता हासिल की। उनकी दादी कर्नाटकी संगीत गाती थीं, लेकिन गंगूबाई को यह पसंद नहीं आया। इसके बाद, वह कुदगोल गांव गईं और सवाई गंधर्व से संगीत की शिक्षा ली। सवाई गंधर्व ने उन्हें बहुत ध्यान से सिखाया।


गंगूबाई का संबंध भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी से गुरु-बंधु का था, और वह उन्हें 'अक्का' कहकर बुलाते थे। एक दिलचस्प किस्सा है कि भीमसेन जोशी अक्सर पानी भरते समय या स्टेशन पर बैठकर गंगूबाई से सवाल पूछते थे और उन्हें 'अक्का-अक्का' कहकर पुकारते थे।


संगीत की दुनिया में कई लोग मानते हैं कि गंगूबाई के गायन के बाद दूसरों के लिए गाना बहुत कठिन हो जाता था, क्योंकि उनका स्वर इतना सुरीला और प्रभावशाली था। उनका व्यक्तित्व सरल और विनम्र था। उन्होंने मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और विदेशों में भी अपनी पहचान बनाई।


गंगूबाई ने अपने जीवन को संगीत के प्रति समर्पित किया। उन्होंने हुबली में डॉ. गंगूबाई हंगल गुरुकुल की स्थापना की, ताकि आने वाली पीढ़ी को उनके जैसे कष्ट न झेलने पड़ें। मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने इस गुरुकुल के लिए 5 करोड़ रुपए का ऐलान किया, जो पूरे भारत में एकमात्र सरकारी गुरुकुल है।


पद्म विभूषण जैसी उपाधियां उनके संगीत ज्ञान के सामने कुछ भी नहीं हैं। उन्होंने अपने शिष्यों को कठोर रियाज करवाया और कई कलाकारों को जीवन का मार्ग दिखाया। गंगूबाई ने चौथी कक्षा तक पढ़ाई की और फिर मेहनत से अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किया। सरकार ने उनके नाम पर मैसूर में डॉ. गंगूबाई हंगल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूजिक एंड फाइन आर्ट्स की स्थापना की।


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