कौन हैं ऊषा गांगुली? रंगमंच की इस दिग्गज का सफर और संघर्ष
ऊषा गांगुली का रंगमंचीय सफर
मुंबई, 22 अप्रैल। यह कहा जाता है कि जब किसी काम के प्रति दृढ़ संकल्प हो, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
इसी तरह का सफर तय किया है ऊषा गांगुली ने, जो एक प्रमुख भारतीय थिएटर निर्देशक, अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनका जन्म जोधपुर में हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी कला को कोलकाता में विकसित किया। बंगाल में हिंदी और सांस्कृतिक रंगमंच पर उनके अभिनय ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि उनके नाटक समाज की कुरीतियों को प्रभावी ढंग से उजागर करते थे। ऊषा का निधन 23 अप्रैल 2020 को हुआ।
ऊषा गांगुली रंगमंच की एक ऐसी शख्सियत रहीं, जिन्होंने 1970 से 2010 के दशक तक कोलकाता में हिंदी रंगमंच को जीवित रखा। उन्होंने 1976 में रंगकर्मी नामक थिएटर समूह की स्थापना की और महाभोज, रुदाली, कोर्ट मार्शल, हिम्मत माई और अंतरयात्रा जैसे नाटकों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। 1998 में, उन्हें 'हिम्मत माई' नाटक के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
समाज में जागरूकता फैलाने वाली ऊषा के लिए रंगमंच तक पहुंचना आसान नहीं था। जोधपुर में जन्मी ऊषा को बचपन से ही नृत्य का शौक था, लेकिन उनके माता-पिता को डर था कि अगर वे अधिक पढ़ाई करेंगी, तो शादी में मुश्किल होगी। नृत्य सीखने के बहाने ही वे घर से बाहर निकल पाती थीं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार पारंपरिक सोच वाला था; वे चाहते थे कि उनकी बेटी कुछ अच्छा करे, लेकिन रंगमंच में नहीं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि नृत्य करते-करते वे अभिनय की ओर बढ़ेंगी।
ऊषा गांगुली ने कोलकाता से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। 1970 में, उन्होंने भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में लेक्चरर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और उसी वर्ष संगीत कला मंदिर के साथ अभिनय भी शुरू किया। उनका पहला नाटक 1970 में 'मिट्टी की गाड़ी' था, जिसमें उन्होंने वसंतसेना की भूमिका निभाई। 1976 में, उन्होंने अपना थिएटर ग्रुप 'रंगकर्मी' स्थापित किया और कई प्रतिष्ठित निर्देशकों को नाटकों के निर्देशन के लिए आमंत्रित किया।
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