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अंजना सुखानी ने साउथ और हिंदी सिनेमा की स्टोरीटेलिंग में बताया अंतर

अंजना सुखानी, जो बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा में सक्रिय हैं, ने हाल ही में एक इंटरव्यू में हिंदी और क्षेत्रीय फिल्मों की कहानी कहने की शैलियों में अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि कैसे हिंदी फिल्में भारतीय दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, जबकि क्षेत्रीय फिल्में संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी होती हैं। इसके अलावा, उन्होंने अपनी हालिया फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के बारे में भी चर्चा की, जो 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। जानें उनके अनुभव और इस फिल्म के बारे में और अधिक।
 

अंजना सुखानी का साउथ सिनेमा और हिंदी फिल्मों पर नजरिया


मुंबई, 20 जुलाई। अभिनेत्री अंजना सुखानी ने बॉलीवुड के साथ-साथ दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। हाल ही में एक विशेष बातचीत में, उन्होंने साउथ सिनेमा और हिंदी फिल्मों के बीच कहानी कहने की शैली में अंतर को उजागर किया।


उनका मानना है कि हिंदी फिल्में भारतीय दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, जबकि क्षेत्रीय फिल्में संस्कृति, भाषा और परंपराओं से गहराई से जुड़ी होती हैं।


अंजना ने कहा, "हिंदी सिनेमा की कहानी कहने की शैली क्षेत्रीय सिनेमा से काफी भिन्न है। हिंदी सिनेमा में भारतीय दर्शकों की पसंद को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि क्षेत्रीय सिनेमा में संस्कृति, भाषा, खान-पान की आदतें, कहानी कहने के तरीके और अभिनय के फॉर्मेट में बदलाव देखने को मिलता है।"


उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न प्रकार की फिल्में ही भारत की विविधता को दर्शाती हैं। एक अभिनेता के रूप में, मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे हिंदी के साथ-साथ पंजाबी, तेलुगु, मराठी, कन्नड़, मलयालम और अन्य भाषाओं में काम करने का अवसर मिला है।


हाल ही में, अंजना इम्तियाज अली की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' में नजर आई थीं, जो 12 जून को रिलीज हुई थी। इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।


फिल्म में उन्होंने 'मेहर' नामक एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भूमिका निभाई है, जिसमें उनके कई दृश्य दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ हैं। फिल्म में दिलजीत दोसांझ, शरवरी और वेदांग रैना भी मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि बनिता संधू, रजत कपूर, संजय सूरी और दानिश पंडोर ने सहायक भूमिकाएं निभाई हैं।


यह फिल्म 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें विभाजन के समय बिछड़े प्यार, यादों और परिवार की भावनात्मक कहानी को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। इस फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने तैयार किया है, जबकि इसके गीत इरशाद कामिल ने लिखे हैं।


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