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Raakaasa: एक हॉरर-कॉमेडी जो पुरानी राहों पर भटक गई

The film 'Raakaasa' attempts to blend horror and comedy but ultimately falls short of delivering a fresh narrative. Centered around an NRI named Veerababu, the story involves an ancient curse and a monster, yet it often strays into unnecessary romantic subplots and forced humor. While the performances of the cast, including Music Shobhan, provide some relief, the weak writing and predictable storyline hinder the film's potential. With a production design that impresses but lacks in visual effects, 'Raakaasa' may appeal to fans of the genre but disappoints those seeking originality. Rating: 2/5.
 
Raakaasa: एक हॉरर-कॉमेडी जो पुरानी राहों पर भटक गई

हॉरर-कॉमेडी का जटिल संतुलन

हॉरर-कॉमेडी एक ऐसा जॉनर है जो डर और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पेश करता है। तेलुगू सिनेमा में हाल के वर्षों में इस शैली का काफी प्रयोग किया गया है। निर्देशक मानसा शर्मा की फिल्म 'Raakaasa' भी इसी दिशा में कदम बढ़ाती है, लेकिन दुर्भाग्यवश, यह फिल्म नयापन लाने में असफल रहती है और पुराने रास्तों पर ही चलती रहती है।


कहानी: सस्पेंस और श्राप का ताना-बाना

कहानी वीरबाबू (संगीत शोभन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक NRI है और अपने गांव लौटता है। वहां, वह एक राक्षस से जुड़ी पुरानी रस्म में फंस जाता है। एक श्राप, चेतावनी के संकेत, और नरबलि का विचार कहानी का मुख्य टकराव बनाते हैं। कागज़ पर, इस सेटअप में सस्पेंस और भावनात्मक दांव-पेच के लिए काफी गुंजाइश है, लेकिन फिल्म इस संभावना को पूरी तरह से नहीं तलाशती। निर्देशक मानसा शर्मा और उनकी टीम कुछ दिलचस्प विचार लाती हैं, लेकिन कहानी बार-बार गैर-ज़रूरी रास्तों पर भटक जाती है। प्रेम कहानियां और ज़बरदस्ती के कॉमेडी सीन फिल्म के बड़े हिस्से पर हावी हो जाते हैं, जिससे यह अपनी मुख्य कहानी से भटक जाती है।


अभिनय: कलाकारों की मेहनत पर भारी पड़ा फीका लेखन

फिल्म को जो चीज़ डूबने से बचाती है, वह इसके कलाकारों का प्रदर्शन है।


संगीत शोभन: वीरबाबू के रूप में वह सहज नजर आते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग अच्छी है और दूसरे हाफ में उन्होंने फिल्म में जान डालने की कोशिश की है।


नयन सारिका: उन्होंने अपनी भूमिका ठीक से निभाई है, लेकिन उनके किरदार में गहराई की कमी है।


कॉमेडी ब्रिगेड: वेनेला किशोर की एंट्री फिल्म को थोड़ी राहत देती है। गेटअप श्रीनु और ब्रह्माजी जैसे अनुभवी कलाकारों ने भी प्रयास किए हैं, लेकिन खराब जोक्स के कारण उनकी मेहनत फीकी पड़ गई।


दिग्गज कलाकार: तनिकेला भरानी और आशीष विद्यार्थी जैसे बड़े नाम छोटे किरदारों में भी अपनी छाप छोड़ते हैं।


कमजोर कड़ियाँ: जहाँ फिल्म मात खा गई

धीमी शुरुआत और ज़बरदस्ती की कॉमेडी: फिल्म का पहला भाग उबाऊ है। कॉमेडी सीन दर्शकों को हंसाने के बजाय उनके सब्र का इम्तिहान लेते हैं। कहानी अक्सर मुख्य मुद्दे (राक्षस और श्राप) से भटककर गैर-ज़रूरी प्रेम प्रसंगों में उलझ जाती है। खलनायक को एक बड़ी ताकत के रूप में दिखाने के बाद, अंत में फिल्म एक घिसे-पिटे इमोशनल ड्रामा का सहारा लेती है, जिससे पूरी फिल्म का प्रभाव खत्म हो जाता है। अनुदीप देव का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर निराश करता है।


तकनीकी पक्ष: कुछ अच्छा, कुछ औसत

फिल्म का प्रोडक्शन डिज़ाइन प्रशंसा के योग्य है, खासकर दूसरे हाफ में दिखाए गए किले के दृश्य। सिनेमैटोग्राफी भी माहौल के साथ न्याय करती है। हालांकि, फिल्म के VFX (विजुअल इफेक्ट्स) और बेहतर हो सकते थे, जो एक हॉरर फिल्म के लिए आवश्यक होते हैं।


निष्कर्ष: क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए?

'Raakaasa' एक ऐसी फिल्म है जो कुछ अलग होने का वादा करती है, लेकिन अंततः वही पुरानी 'भूतिया हवेली और कुछ डरे हुए किरदारों' के जाल में फंस जाती है। यदि आप संगीत शोभन के प्रशंसक हैं या टाइम-पास के लिए कोई हॉरर-कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो इसे एक बार देख सकते हैं। लेकिन यदि आप किसी नई या रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी की तलाश में हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।


रेटिंग

2/5


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