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यश चोपड़ा: बॉलीवुड के रोमांस के बादशाह की अनकही कहानी

यश चोपड़ा, जिन्हें 'रोमांस का बादशाह' कहा जाता है, ने हिंदी सिनेमा में एक नई पहचान बनाई। उनके निर्देशन में बनी कई फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई हैं। जानें उनके जीवन, करियर और योगदान के बारे में।
 

यश चोपड़ा: एक अद्वितीय फिल्म निर्माता




मुंबई, 26 सितंबर। हिंदी सिनेमा की चर्चा करते समय एक नाम हमेशा सामने आता है, जिसने रोमांटिक फिल्मों के माध्यम से बॉलीवुड को नई पहचान दी और कई सितारों को चमकाया। वह नाम है यश चोपड़ा।


उन्हें 'रोमांस का बादशाह' कहा जाता है। यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर 1932 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ। उनके पिता, लाला विलायती राज चोपड़ा, ब्रिटिश पंजाब प्रशासन में एक अकाउंटेंट थे। यश चोपड़ा अपने आठ भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और उन्होंने अपनी शिक्षा लाहौर में पूरी की। बाद में उनका परिवार लुधियाना में बस गया।


यश ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने बड़े भाई बीआर चोपड़ा के सहायक के रूप में कदम रखा और 1959 में सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्म 'धूल का फूल' से निर्देशन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मों का निर्देशन किया। 1971 में, यश चोपड़ा ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी यश राज फिल्म्स की स्थापना की।


अपने पांच दशकों के करियर में, यश चोपड़ा ने 'वक्त', 'दीवार', 'कभी-कभी', 'सिलसिला', 'चांदनी', 'लम्हे', 'डर', 'दिल तो पागल है', 'वीर-जारा', 'त्रिशूल', 'इत्तेफाक', 'धर्मपुत्र' जैसी कई बेहतरीन फिल्में बनाई। ये फिल्में आज भी युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं।


यश चोपड़ा ने हिंदी सिनेमा को एक नई दिशा दी। उन्होंने न केवल कालातीत फिल्में बनाई, बल्कि कई कलाकारों को भी सुपरस्टार बनाया। शाहरुख खान को 'किंग ऑफ रोमांस' बनाने का श्रेय उन्हें दिया जाता है, और अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' के रूप में स्थापित करने का भी।


यश चोपड़ा का व्यक्तिगत जीवन भी दिलचस्प है। उन्होंने 1970 में पामेला सिंह से विवाह किया, जो एक प्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर, लेखिका और फिल्म प्रोड्यूसर थीं। उनके दो बेटे हैं: आदित्य चोपड़ा, जो फिल्म निर्देशक और यश राज फिल्म्स के प्रमुख हैं, और उदय चोपड़ा, जो अभिनेता और निर्माता हैं।


यश चोपड़ा को उनके कला के क्षेत्र में योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण और कई अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने करियर में 6 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 8 फिल्मफेयर पुरस्कार जीते। उनका निधन 21 अक्टूबर 2012 को मुंबई में हुआ।


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