फिल्म 'नखरेवाली': सामाजिक मुद्दों पर हल्की-फुल्की कॉमेडी का प्रयास
फिल्म का सारांश
निर्देशक राहुल शंखल्या की फिल्म 'नखरेवाली' समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करने का प्रयास करती है। यह कहानी उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर से निकलकर दिल्ली यूनिवर्सिटी की पृष्ठभूमि पर आधारित है। हालांकि, इसकी कमजोर पटकथा और पुराने फिल्मी फॉर्मूलों के कारण यह दर्शकों पर प्रभाव डालने में असफल रहती है। 30 अक्टूबर, 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म में हंसी-मजाक के बीच महिलाओं के प्रति समाज की सोच और पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण पर सवाल उठाए गए हैं।
कहानी का ताना-बाना: सुमित का सफर
कहानी सुमित मिश्रा (अंश दुग्गल) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने दोस्त झाड़ी (आकाश मखीजा) के साथ हरदोई से दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए आता है। नए सांस्कृतिक माहौल में कदम रखते ही, सुमित खुद को दो दुनियाओं के बीच फंसा हुआ पाता है। उसकी बैचमेट मिहिका (आयुषी वर्मा) के बुलावे पर वह एक हाई-क्लास ग्रुप का हिस्सा बन जाता है। इसी दौरान, वह परिधि (प्रगति श्रीवास्तव) के घर में किराएदार बनता है।
कहानी में मोड़
कहानी में असली मोड़ तब आता है जब परिधि सहजता से सुमित से अंतरंगता की बात करती है, जिससे उसकी पितृसत्तात्मक सोच उजागर होती है। सुमित परिधि को उसकी इच्छाओं के लिए जज करता है, जिससे नाराज होकर वह उससे सारे रिश्ते तोड़ लेती है। सुमित को अपनी गलती का अहसास होता है और वह उसे शादी के लिए प्रपोज करता है। परिधि के माता-पिता एक शर्त रखते हैं कि उसे एक महीने में सरकारी नौकरी हासिल करनी होगी।
प्रगतिशील सोच, लेकिन कमजोर निष्पादन
लेखक दिव्य निधि शर्मा और सत्य व्यास ने 'नखरेवाली' को सामाजिक जागरूकता के साथ लिखा है। फिल्म में पितृसत्तात्मक सोच, सहमति का महत्व और रोजमर्रा का उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई है। हालांकि, घिसे-पिटे फॉर्मूलों के कारण यह फिल्म प्रभावी नहीं बन पाई।
अभिनय और कलाकारों के प्रयास
अंश दुग्गल और प्रगति श्रीवास्तव ने अपनी भूमिकाओं में अच्छा प्रदर्शन किया है। आकाश मखीजा ने 'झाड़ी' के किरदार में बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग दिखाई है। अनुभवी अभिनेता कुमुद मिश्रा और बृजेंद्र काला ने भी अपनी अदाकारी से फिल्म में गहराई लाने का प्रयास किया है।
तकनीकी पक्ष और संगीत
तकनीकी दृष्टि से 'नखरेवाली' प्रभावित नहीं करती। फिल्म का संगीत कमजोर है और बैकग्राउंड स्कोर कभी-कभी शोर में बदल जाता है।
निष्कर्ष
'नखरेवाली' एक ऐसी फिल्म है जो अच्छे विचारों के साथ समाज में सुधार लाने का प्रयास करती है। हालांकि, यह घिसे-पिटे किरदारों और दोहराई जाने वाली स्थितियों के कारण दर्शकों पर गहरा प्रभाव नहीं छोड़ पाती। यदि आप हल्की-फुल्की कॉमेडी की तलाश में हैं, तो यह फिल्म आपके लिए मनोरंजन कर सकती है।
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